कब है आश्विन माह का अंतिम प्रदोष व्रत (सौ.सोशल मीडिया)  
धर्म

आश्विन माह का अंतिम प्रदोष शनिवार को, जानिए कब शुरू हो रही है तिथि, पूजाविधि और इस प्रदोष की महिमा

Shani Pradosh Vrat:आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से शनि प्रदोष व्रत का बड़ा महत्व है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से शिव और शनि की कृपा प्राप्‍त होती है और शानि के कुप्रभाव से मुक्ति मिलती है।

सीमा कुमारी

Ashwin Pradosh Vrat 2025: देवों के देव महादेव को समर्पित प्रदोष व्रत हर महीने के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है। इस बार आश्विन माह का अंतिम प्रदोष व्रत 4 अक्तूबर को रखा जाएगा। इस दिन शनिवार होने के कारण यह 'शनि प्रदोष' कहलाएगा।

मान्यता है कि जो भी व्यक्ति इस व्रत को रखता है उसपर भगवान शिव की असीम कृपा बनी रहती है। साथ ही, उसकी सभी मनोकामनाएं भी शिव जी पूरी करते हैं। शास्त्रों के मुताबिक, प्रदोष व्रत करने से न केवल जीवन में सकारात्मकता आती है, बल्कि सुख-समृद्धि और जीवन से संकट भी दूर होते हैं।

ज्योतिष मान्यता के अनुसार यह व्रत कुंडली में चंद्रमा की स्थिति को भी मजबूत करता है। इसके प्रभाव से मानसिक शांति और स्थिरता प्राप्त होती है। हालांकि, विशेष रूप से कन्याओं के लिए यह व्रत अत्यंत फलदायी है।

इसके प्रभाव से मनचाहा और योग्य वर की प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। वर्तमान में आश्विन मास चल रहा है और इस महीने में यह उपवास कब रखा जाएगा, आइए जानते हैं।

कब है आश्विन माह का अंतिम प्रदोष व्रत

आपको बता दें, पंचांग के अनुसार, इस वर्ष आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 4 अक्तूबर शाम 5 बजकर 8 मिनट पर होगी। इसका समापन 5 अक्तूबर को दोपहर 3 बजकर 04 मिनट पर है। ऐसे में 4 अक्तूबर को प्रदोष व्रत रखा जाएगा। इस दिन शनिवार होने के कारण यह 'शनि प्रदोष' कहलाएगा।

कैसे करें प्रदोष व्रत पर भगवान भोलेनाथ की पूजा

  • प्रदोष व्रत रखने से पहले एक चौकी पर भगवान शिव की मूर्ति स्थापित करें।
  • अभी शिवलिंग पर जल, घी, दूध, शहद, शक्कर से अभिषेक करें।
  • प्रभु को फूल माला और शमी का फूल चढ़ाएं।
  • इसके बाद महादेव के मंत्रों का स्मरण करते हुए बेलपत्र अर्पित करें।
  • अब घी का दीपक जलाएं।
  • देवी को श्रृंगार का सामान अर्पित करें।
  • अंत में प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करें और शिव आरती करें।

जानिए शनि प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व

सनातन धर्म में शनि प्रदोष व्रत का बड़ा महत्व है। इस व्रत को लेकर मान्यता है कि इससे शनि के बुरे प्रभाव से बचाव होता है। इस व्रत को करने से भक्तों को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। इसलिए इस दिन प्रदोष व्रत का लाभ उठाएं और भगवान शिव और शनि देव का आशीर्वाद प्राप्त करें।

ऐसा करने से आपको शिव और शनि की कृपा प्राप्‍त होगी। शनि प्रदोष व्रत एक खास मौका है जब आप अपनी मनोकामनाएं पूरी कर सकते हैं। इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से विशेष फल मिलता है।

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