Shaniwar Puja Vidhi: सनातन धर्म में सप्ताह का हर दिन किसी देवी देवता को समर्पित है। ऐसे में शनिवार का दिन न्याय और कर्म के देवता शनिदेव को समर्पित है। शनि देव को न्याय का देवता कहा जाता है। शायद यही वजह है कि शनि देव से सभी को डर लगता है।
कई लोग तो शनि के प्रकोप से बचने के लिए उनकी हर शनिवार को पूजा भी करते हैं। ज्योतिषयों के अनुसार, शनि देव की पूजा करते वक्त कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना जरूरी होता है। आइए जानते हैं, शनिदेव की पूजा करते वक्त किन नियमों का पालन करना चाहिए।
शनिदेव की पूजा के समय रखें इन बातों का ध्यान
ज्योतिष- शास्त्र के अनुसार, शनिदेव की पूजा करते समय कुछ सावधानियां बरतनी जरूरी हैं। भगवान शनि एक ऐसे देवता है, जो अपने भक्तों पर प्रसन्न होते हैं तो उन्हें राजा बना देते हैं, इसलिए शनिदेव का प्रसन्न करना बहुत जरूरी होता है।
हालांकि इस दौरान कुछ सावधानियां भी जरूर बरतें, जैसे शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा आराधना करने के दौरान लाल रंग के वस्त्र बिल्कुल न पहनें। साथ ही शनिवार के दिन शनिदेव की तरफ पीठ नहीं करनी चाहिए।
कहते है, शनि देव की पूजा हमेशा स्टील या लोहे के बर्तन में ही करनी चाहिए। भूल से भी पीतल और तांबे के बर्तन में आपको शनि देव की पूजा नहीं करनी चाहिए क्योंकि यह सूर्य का प्रतिनिधित्व करते हैं और शनि और सूर्य की नहीं बनती हैं। बेस्ट होगा कि आप लोहे के बर्तन का ही इस्तेमाल करें क्योंकि लोहा शनि का प्रतिनिधित्व करता है। लोहे के बर्तन से शनि देव को जल चढ़ाना बहुत ही शुभ माना गया है।
शनि देव के आगे दीपक जलाने के स्थान पर अगर आप उन्हें दीपक दिखाकर पीपल के पेड़ के नीचे रखती हैं, तो आपको इससे ज्यादा फायदे होते हैं। क्योंकि पीपल का पेड़ शनिदेव को अतिप्रिय है। इस बात का भी ध्यान रखें कि शनिदेव को आप सरसों के तेल का दिया ही जलाएं।
वैसे तो सभी देवी देवताओं को मीठे का भोग चढ़ता है, मगर शनिदेव को काले तिल और खिचड़ी का भोग ही चढ़ाया जाता है। आपको बता दें कि शनि देव को पीली खिचड़ी नहीं चढ़ती है। इसलिए उरद की दाल की खिचड़ी ही आपको बना कर शनि देव को चढ़ानी चाहिए।