रविवार व्रत का आध्यात्मिक महत्व (सौ.सोशल मीडिया)  
धर्म

रविवार को गुड़ और तांबे के दान का महत्व जानिए, बदल जाएगा भाग्य

Benefits of sunday fast: रविवार का दिन ग्रहों के राजा सूर्यदेव की पूजा अर्चना के लिए समर्पित है। इस दिन गुड़ और तांबे का दान करने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं और अपनी कृपा बरसाते है।

सीमा कुमारी

Religious Donation On Sunday: इस साल 2025 पौष माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि रविवार के दिन पड़ रही है और यह शुभ एवं पावन दिन ग्रहों के राजा सूर्यदेव की पूजा अर्चना के लिए समर्पित है। शास्त्रों में सूर्य को आत्मा, पिता, मान-सम्मान और राजसत्ता का कारक कहा गया है। इसलिए रविवार को की गई सूर्य पूजा और दान का विशेष फल बताया गया है।

आपको बता दें, पंचांग के अनुसार, पौष माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि रविवार शाम 6 बजकर 49 मिनट तक रहेगी। इसके बाद एकादशी शुरू हो जाएगी। इस दिन सूर्य वृश्चिक राशि में और चंद्रमा रात 9 बजकर 41 मिनट तक कन्या राशि में रहेंगे। इसके बाद तुला राशि में गोचर करेंगे।

ये है रविवार व्रत का शुभ मुहूर्त

आपको बता दें, पंचांग के अनुसार, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 55 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 37 मिनट तक रहेगा और राहुकाल का समय शाम 4 बजकर 8 मिनट से शुरू होकर 5 बजकर 26 मिनट तक रहेगा। इस तिथि पर कोई विशेष पर्व नहीं है, लेकिन वार के हिसाब से या फिर आपकी कुंडली में सूर्य कमजोर है, तो आप रविवार का व्रत रख सकते हैं। धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि यदि किसी कारणवश आप व्रत नहीं रह सकते हैं, तो आप इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में तांबे के लोटे में सूर्य देव को अर्घ्य जरूर दें और इस दिन तामसिक भोजन या फिर बाल कटवाने से परहेज करें।

  • रविवार व्रत का आध्यात्मिक महत्व

धार्मिक ग्रथों में रविवार व्रत का आध्यात्मिक महत्व बताया गया है। कहा जाता है कि रविवार के दिन व्रत रखने से सुख, समृद्धि, आरोग्य और मोक्ष मिलता है। वहीं, इसे शुरू करने के लिए जातक किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के पहले रविवार से शुरू कर सकते हैं। इसके अलावा, वे आदित्य स्त्रोत का पाठ और 'ऊं सूर्याय नमः' और 'ऊं घृणि सूर्याय नमः' का जाप जरूर करें। ऐसा करने से भी विशेष लाभ मिलता है।

  • रविवार का व्रत कैसे करें?

रविवार के व्रत में प्रातः स्नान कर सूर्य देव को जल अर्पित किया जाता है। इसके बाद दिनभर संयम और सात्त्विक आहार का पालन किया जाता है। गुड़ और तांबे का दान जरूरतमंद को करना शुभ माना जाता है। व्रत का उद्देश्य आत्मशुद्धि और सूर्य कृपा प्राप्त करना होता है।

  • दान करते समय क्या रखें ध्यान?

दान हमेशा श्रद्धा और क्षमता के अनुसार करना चाहिए। किसी भी प्रकार का दिखावा या अहंकार दान के फल को कम कर सकता है। सच्चे मन से किया गया छोटा दान भी विशेष पुण्य देता है।

  1. गुड़ और तांबे के दान का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुड़ को मिठास और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है, जबकि तांबा सूर्य से जुड़ी धातु मानी जाती है। रविवार को गुड़ और तांबे का दान करने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं और व्यक्ति के जीवन में आने वाली बाधाओं में कमी आती है।

  • सूर्य दोष शांति से जुड़ी मान्यताएं

ज्योतिष में सूर्य दोष को आत्मविश्वास, करियर और स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का कारण माना जाता है। मान्यता है कि रविवार के दिन गुड़ और तांबे का दान करने से सूर्य दोष शांत होता है और व्यक्ति को सामाजिक प्रतिष्ठा तथा मानसिक मजबूती मिलती है।

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