शिवलिंग की परिक्रमा आधी क्यों की जाती है? (सौ.AI) 
धर्म

शिवलिंग की पूरी नहीं, आधी परिक्रमा ही क्यों की जाती है? जानें चंद्राकार परिक्रमा का रहस्य और सही नियम

Shivling Parikrama 2026:शिवलिंग की परिक्रमा हमेशा पूरी नहीं, बल्कि चंद्राकार यानी आधी करने की परंपरा है। जानें इसके पीछे का धार्मिक रहस्य, शास्त्रीय मान्यता, सही नियम और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

सीमा कुमारी

Shivling Parikrama Religious Beliefs : हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले लोग देवी-देवताओं की पूजा- अर्चना करने के बाद अपने ही स्थान पर या संबंधित मंदिर की पूरी परिक्रमा करते है। लेकिन, आपने देखा होगा कि, शिवलिंग की पूजा करने के बाद शिवभक्त शिवलिंग की आधी परिक्रमा करते है। जानिए क्यों की जाती है शिवलिंग की आधी परिक्रमा और क्यों नहीं लांघी जाती जलाधारी-

शिवलिंग की परिक्रमा आधी क्यों की जाती है?

धर्म शास्त्रों के मुताबिक, शिवलिंग को शिव और शक्ति दोनों की सम्मिलित ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। बताया जाता है कि, शिवलिंग पर जल चढ़ाने से जल पवित्र हो जाता है। यह जिस मार्ग से निकलता है उसे निर्मली, सोमसूत्र और जलाधारी कहते है।

मान्यता है कि शिवलिंग इतनी शक्तिशाली होती है कि उस पर जल चढ़ाने से जल में शिव और शक्ति की उर्जा के कुछ अंश समाहित हो जाते है। प्रक्रम के समय जब कोई इसे लांघता है तो उसकी टांगों के बीच से शिवलिंग की ऊर्जा उसके अंदर प्रवेश कर जाती है। इसकी वजह से उसमें वीर्य या रज संबंधित शारीरिक परेशानियां पैदा हो जाती है।

शिवलिंग की परिक्रमा कहां से शुरू करें ?

  • शिवलिंग के सामने खड़े होकर पहले हाथ जोड़ें और भगवान शिव का ध्यान करें। इसके बाद परिक्रमा शुरू करें। ध्यान रखें कि मंदिरों में परिक्रमा आरंभ करते हुए जहां आराध्य को अपने दाहिने रखा जाता है, वहीं शिवलिंग की परिक्रमा मंदिर की बनावट और जलाधारी की दिशा को ध्यान में रखकर की जाती है।
  • परिक्रमा करते हुए जलाधारी के निकास यानी सोमसूत्र के एक किनारे तक पहुंचें। अब उसी रास्ते से वापस लौटें। इसके बाद दूसरी दिशा में चलते हुए सोमसूत्र के दूसरे किनारे तक पहुंचें। वहां प्रणाम करें और फिर अपने प्रारंभिक स्थान पर लौट आएं।
  • इस तरह सोमसूत्र को लांघे बिना दोनों ओर जाकर की गई परिक्रमा पूरी हो जाती है। याद रखें कि जलधारा के ऊपर से पैर रखकर दूसरी तरफ नहीं जाया जाता है।
  • शिवलिंग के आसपास इस तरह चलने से बनने वाला रास्ता अर्धचंद्र जैसा दिखाई देता है। इसीलिए इसे शिवलिंग के आसपास की जाने वाली परिक्रमा को 'चंद्राकार परिक्रमा' कहा गया है।

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शिवलिंग की चंद्राकार परिक्रमा कैसे करें?

  • शिवलिंग के सामने हाथ जोड़कर प्रणाम करें।
  • जलाधारी और उससे निकलने वाली जलधारा को पहचानें।
  • एक ओर से परिक्रमा शुरू करें।
  • सोमसूत्र के एक किनारे तक पहुंचकर रुक जाएं।
  • उसे लांघने के बजाय उसी रास्ते से वापस आएं।
  • अब दूसरी ओर से चलते हुए सोमसूत्र के दूसरे किनारे तक जाएं।
  • वहां से लौटकर शिवलिंग के सामने प्रणाम करें।
  • परिक्रमा करते समय जल्दी न करें। शांत मन से ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करते हुए चल सकते हैं।

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