षटतिला एकादशी कथा (सौ.सोशल मीडिया) 
धर्म

षटतिला एकादशी पर यह कथा जरूर पढ़ें, वरना अधूरा रह जाएगा व्रत

Ekadashi Rituals: षटतिला एकादशी पर तिल के 6 प्रयोगों के साथ इस कथा का श्रवण अनिवार्य है। बिना कथा व्रत अधूरा रहता है; जानें कैसे भगवान विष्णु की कृपा से दरिद्रता दूर होती है।

सीमा कुमारी

Shattila Ekadashi Vrat Katha: जगत के संचालनकर्ता माने जाने वाले भगवान श्री विष्णु की पूजा के लिए एकादशी व्रत को अत्यधिक पुण्यदायी माना गया है। इस व्रत का महत्व तब और भी ज्यादा बढ़ जाता है, जब यह माघ मास के कृष्णपक्ष की एकादशी तिथि पर पड़ता है। इस बार यह एकादशी यानी षटतिला एकादशी ​का व्रत कल 14 जनवरी को मनाया जाने वाला है।

शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि इस व्रत का पूर्ण पुण्य कथा श्रवण या पाठ के बिना प्राप्त नहीं होता। यही कारण है कि षटतिला एकादशी कथा को अत्यंत पावन और फलदायी माना गया है।

षटतिला एकादशी का नाम ही इसके महत्व को दर्शाता है। ‘षट’ यानी छह और ‘तिल’ यानी तिल के छह प्रकार के प्रयोग। इस दिन तिल से स्नान, तिल का उबटन, तिल से हवन, तिल का दान, तिल युक्त भोजन और तिल का सेवन किया जाता है। मान्यता है कि तिल पापों का नाश करता है और भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है।

षटतिला एकादशी व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक ब्राह्मणी थी जो नियमित रूप से व्रत और पूजा करती थी, लेकिन दान से विमुख रहती थी। जीवन भर तपस्या करने के बाद जब उसकी मृत्यु हुई, तो उसे स्वर्ग तो प्राप्त हुआ, परंतु वहां उसे भोजन और सुख-सुविधाओं का अभाव रहा। दुःखी होकर वह भगवान श्री विष्णु के पास पहुँची। भगवान विष्णु ने उसे बताया कि केवल व्रत करने से पूर्ण फल नहीं मिलता, जब तक उसमें दान और करुणा न जुड़ी हो। उन्होंने ब्राह्मणी को माघ कृष्णपक्ष की षटतिला एकादशी का व्रत करने और तिल के छह प्रकार से भगवान की पूजा करने का निर्देश दिया। ब्राह्मणी ने श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखा, तिल का दान किया और कथा का श्रवण किया। इसके प्रभाव से उसके समस्त पाप नष्ट हो गए और उसे वैकुंठ धाम की प्राप्ति हुई।

षटतिला एकादशी व्रत का महत्व

आज के तनावपूर्ण जीवन में षटतिला एकादशी केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और मानसिक शांति का माध्यम बन गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि उपवास, संयम और दान व्यक्ति को नकारात्मकता से दूर रखता है।

इन बातों का रखें विशेष ध्यान

  • षटतिला एकादशी के शुभ दिन पर कथा का पाठ या श्रवण अवश्य करें, चाहे संक्षेप में ही क्यों न हो।
  • इस दिन तिल का दान गरीब या जरूरतमंद को अवश्य करें।
  • व्रत के दिन क्रोध, अहंकार और नकारात्मक सोच से दूर रहें।
  • भगवान विष्णु के मंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जाप करें।

शास्त्रों के अनुसार, षटतिला एकादशी व्रत की कथा इस पर्व की आत्मा है। इसके बिना व्रत अधूरा माना जाता है। श्रद्धा से कथा पढ़कर और तिल दान करके भक्त निश्चित रूप से भगवान विष्णु की कृपा और पुण्यफल प्राप्त करता है।

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