Ekadashi Kab Hai : हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को भगवान विष्णु के साथ ही माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त करने का सबसे श्रेष्ठ व्रत माना जाता हैं। हर महीने कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में एक-एक एकादशी पड़ती है, जिनका अपना अलग धार्मिक महत्व होता इस बार सावन माह की पहली एकादशी यानी कामिका एकादशी 9 अगस्त 2026, रविवार को रखा जाएगा।
धर्म ग्रथों में बताया गया है कि, कामिका एकादशी को उपवास करने से श्रेष्ठ संतान की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही कामिका एकादशी का व्रत रखने से जातक की सारी मनोकामनाएं भी शीघ्र पूरी हो जाती हैं।हैं।
कामिका एकादशी का पारण 10 अगस्त 2026 को किया जाएगा। पारण के लिए शुभ समय सुबह 6 बजकर 18 मिनट से सुबह 8 बजे तक रहेगा। पारण के दिन द्वादशी तिथि समाप्त होने का समय सुबह 8 बजकर 7 मिनट पर रहेगा।
बता दें कि एकादशी के व्रत को समाप्त करने को पारण कहते हैं। एकादशी व्रत के अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण किया जाता है। एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना अत्यंत जरूरी होता है। द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो गयी हो तो एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय के बाद ही होता है।
पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 8 अगस्त 2026 को सुबह 10 बजकर 29 मिनट पर शुरू होगी और 9 अगस्त 2026 को सुबह 7 बजकर 34 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर कामिका एकादशी का व्रत 9 अगस्त 2026, रविवार को रखा जाएगा।
कामिका एकादशी के दिन द्विपुष्कर योग और हर्षण योग का संयोग भी बन रहा है। द्विपुष्कर योग दिन में 11 बजकर 04 मिनट पर बनेगा और यह दोपहर में 02 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। हर्षण योग प्रात:काल से लेकर 10 अगस्त को 2:04 ए एम तक रहेगा।
वहीं कामिका एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 22 मिनट से सुबह 5 बजकर 4 मिनट तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजे से दोपहर 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा।
कहा जाता है कि कामिका एकादशी के दिन व्रत रखने और दीन-हीन, असहाय लोगों को दान देने से व्यक्ति सभी प्रकार के पापों से मुक्त हो जाता है। चातुर्मास में पड़ने वाली कामिका एकादशी का अपना अलग ही महत्व है। मान्यताओं के अनुसार यह एकादशी अश्वमेघ यज्ञ के समान फल प्रदान करती है। इस दिन भगवान विष्णु को तुलसी के पत्ते अर्पित करना बेहद शुभ माना जाता है।