रुद्राक्ष धारण करने के नियम   (सौ.AI)
धर्म

Rudraksha Niyam: रुद्राक्ष पहनकर भूलकर भी न करें ये काम, वरना शिव कृपा की जगह हो सकता है उल्टा असर

Rudraksha Wearing Rules: रुद्राक्ष को भगवान शिव का प्रिय माना जाता है। लेकिन रुद्राक्ष पहनने के बाद कुछ काम करने से बचना चाहिए। जानिए रुद्राक्ष धारण करने के जरूरी नियम और किन गलतियों से बचना चाहिए।

सीमा कुमारी

Rudraksha Wearing Benefits: रुद्राक्ष को भगवान शिव का अंश माना गया है। कहा जाता है कि जो भी व्यक्ति रुद्राक्ष धारण करते हैं, उनके ऊपर भगवान शिव की विशेष कृपा बरसती है। शिव पुराण के अनुसार, रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से हुई है। इसे बहुत ही चमत्कारी और आलौकिक भी बताया गया है।

धर्म शास्त्रों बताया जाता है कि, रुद्राक्ष एक मुखी से लेकर इक्कीस मुखी तक होते है। इसे पहनने से हर तरह के संकटों से मुक्ति मिलती है।

शिव पुराण में रुद्राक्ष की महिमा का वर्णन किया गया है। लेकिन इसे हर कोई धारण नहीं कर सकता है। ज्योतिषयों के अनुसार, रुद्राक्ष धारण करने के बाद भी कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी भी है। आइए जानते हैं रुद्राक्ष से जुड़े क्या है नियम?

क्या है रुद्राक्ष से जुड़े नियम?

ज्योतिषयों के अनुसार, हाथ या कलाई में रुद्राक्ष पहनने के लिए कुछ विशेष नियम और सावधानियों का पालन करना जरूरी होता है, जिन्हें ध्यान में रखकर ही शुभ फल प्राप्त किया जा सकता है।

सोमवार, शिवरात्रि या सावन पर पहनना शुभ

ज्योतिषयों के अनुसार, रुद्राक्ष हमेशा सोमवार, शिवरात्रि या सावन पर पहनना शुभ होता है। रुद्राक्ष को हमेशा लाल, पीले, सफेद धागे या चांदी सोने की धातु में ही पिरोकर पहनें। गलती से भी काले धागे के इस्तेमाल न करें।

ऐसी जगहों पर न धारण करें रुद्राक्ष

शास्त्रों में ये भी बताया गया है जब किसी की शवयात्रा में अगर शामिल हो रहे हैं तो रुद्राक्ष को उतार देना चाहिए, उस वक्त भी रुद्राक्ष को धारण नहीं करना चाहिए। भगवान भोलेनाथ जन्म और मृत्यु से परे हैं और उनके अंश को भी जन्म और मृत्यु से जुड़े स्थानों पर नहीं पहनकर जाना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इससे रुद्राक्ष में मौजूद शक्तियां निष्क्रिय हो जाती हैं।

मांस, मदिरा और तामसिक भोजन वाले लोग

शास्त्रों में बताया गया है कि रुद्राक्ष धारण करने वाले व्यक्ति को मांस, मदिरा और तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि सात्विक आहार और शुद्ध आचरण से रुद्राक्ष धारण करने के धार्मिक नियमों का पालन होता है।

सोते समय न पहनें

रुद्राक्ष को सोने से पहले भी उतार देना चाहिए। क्योंकि सोते समय हमारा शरीर अशुद्ध और निस्तेज रहता है। इसके साथ ही सोते समय रुद्राक्ष टूटे का भी भय बना रहता है।

जहां बच्चे का जन्म हुआ हो

जहां बच्चे का जन्म हुआ हो, वहां भी इसे पहनकर नहीं जाना चाहिए। हालांकि बच्चे के जातकर्म संस्कार पूरा हो जाने के बाद यह बंदिश खत्म हो जाती है। इसका कारण भी वही है कि जन्म और मृत्यु वाले स्थानों पर रुद्राक्ष को धारण नहीं करना चाहिए।

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