Rakhi Bandhne Ke Baad Aarti : हर साल की तरह इस बार भी रक्षाबंधन का त्योहार धूमधाम एवं उत्साह के साथ मनाया जाएगा। रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम और स्नेह से जुड़ा है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसके सुखी, स्वस्थ व दीर्घायु जीवन की कामना करती है।
आपको बता दें ,राखी बांधने के बाद भाई की आरती करने की परंपरा भी कई परिवारों में निभाई जाती है। लेकिन क्या आप जानते है कि, आखिर राखी बांधने के बाद भाई की आरती क्यों की जाती है? क्या आरती केवल एक रस्म है या इसके पीछे कोई धार्मिक मान्यता भी जुड़ी है? आइए जानते हैं रक्षाबंधन पर राखी बांधने के बाद आरती करने का धार्मिक महत्व
सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार, आरती को ईश्वर के प्रति अपनी असीम भक्ति और सम्मान प्रकट करने का माध्यम माना गया है। जब बहन राखी बांधने के बाद भाई की आरती उतारती है, तो वह दीपक की ज्योति के माध्यम से अपने भाई के अच्छे स्वास्थ्य, सुखी जीवन और दीर्घायु होने की प्रार्थना भगवान से करती है। यह केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि अपने भाई के लिए बहन का दिल से दिया गया आशीर्वाद और कामना होती है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, दीपक को शुभता, प्रकाश और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। जब बहन राखी बांधने के बाद भाई की आरती करती है तो इसके पीछे उसके मंगल और सुखी जीवन की कामना का भाव जुड़ा होता है। आरती के दौरान दीपक भाई के सामने घुमाया जाता है।
मान्यता है कि इस तरह बहन अपने भाई के जीवन में सुख-समृद्धि और शुभता की कामना करती है। आरती को भगवान के प्रति समर्पण और प्रार्थना से भी जोड़ा जाता है, इसलिए इस अवसर पर भाई की आरती करना धार्मिक रूप से शुभ माना जाता है।
रक्षाबंधन पर बहन भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी रक्षा और मंगल की कामना करती है। इसके बाद आरती करते समय भी भाई के स्वस्थ और दीर्घायु होने की प्रार्थना की जाती है। परंपरा के अनुसार आरती के बाद भाई के माथे पर तिलक लगाया जाता है और मिठाई खिलाई जाती है।
इसके बाद भाई अपनी बहन को उपहार देता है और उसकी रक्षा का संकल्प लेता है। इस तरह राखी बांधने, तिलक और आरती की रस्में एक-दूसरे से जुड़ी हुई मानी जाती हैं।
हिंदू धर्म में दीपक को अत्यंत पवित्र माना गया है। पूजा-पाठ में दीप प्रज्वलित करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। धार्मिक मान्यता में प्रकाश को अंधकार दूर करने वाला और शुभता का प्रतीक माना जाता है।
रक्षाबंधन पर भाई की आरती में भी दीपक का इस्तेमाल इसी धार्मिक भाव के साथ किया जाता है। बहन दीपक से भाई की आरती उतारकर उसके जीवन में सुख और शुभता की कामना करती है।