Putrada Ekadashi Mantra: हिन्दू धर्म में पुत्रदा एकादशी एकमात्र ऐसी एकादशी है। जो संतान सुख की कामना के लिए रखा जाता है। यह एकादशी साल में दो बार मनाई जाती है। एक पौष माह और दूसरा सावन माह में। सावन शुक्ल पक्ष की इस एकादशी पर भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा करने की भी विशेष परंपरा है।
मान्यता है कि इस दिन व्रत और विधि-विधान से पूजा करने से संतान से जुड़ी मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है। इसी दिन संतान गोपाल सिद्ध मंत्र का जाप करना भी शुभ माना जाता है। आइए जानिए क्या है यह विशेष मंत्र और किस तरह से इसका जाप करना शुभ माना जाता है।
संतान सुख की कामना के लिए पुत्रदा एकादशी के दिन पति और पत्नी दोनों मिलकर गोपाल सिद्ध मंत्र का जाप करें। पूजा के बाद भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की प्रतिमा के सामने बैठकर श्रद्धापूर्वक मंत्र का जाप किया जा सकता है।
पुत्रदा एकादशी के दिन मंत्र जाप के साथ बाल गोपाल को तुलसी दल, मक्खन मिश्री, फल और मिठाई का भोग लगाने की भी परंपरा है। इसके बाद भगवान से संतान के सुख, स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करें।
संतान गोपाल सिद्ध मंत्र का 5, 7 या 11 बार जाप करने की परंपरा बताई गई है। जाप करते समय मन को शांत रखें और भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया जाप विशेष फलदायी माना जाता है।
धर्म शास्त्रों में संतानहीन दंपतियों के लिए यह व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है। सावन मास में भगवान शिव के साथ-साथ भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति के पिछले पाप नष्ट होते हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है। एकादशी का व्रत रखने से मानसिक तनाव कम होता है और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।