Premanand Maharaj (Source. Pinterest) 
धर्म

माँ के गर्भ में बच्चा भगवान से क्या करता है वादा, जन्म के साथ भूल जाता है सब? प्रेमानंद जी महाराज ने बताया सच

Premanand Maharaj Talks About Child Birth: प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, मनुष्य का जन्म कोई साधारण प्रक्रिया नहीं बल्कि एक अत्यंत कष्टदायक यात्रा है। जो संसार में प्रभु कि मर्जी से आती है।

सिमरन सिंह

Mystery Of Human Life: प्रख्यात संत प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, मनुष्य का जन्म कोई साधारण प्रक्रिया नहीं बल्कि एक अत्यंत कष्टदायक यात्रा है। जब जीव इस संसार में आता है, तो वह प्रकृति के माध्यम से अन्न में प्रवेश करता है और फिर माता-पिता के जरिए गर्भ में स्थान पाता है।

गर्भ में रहना किसी आराम जैसा नहीं, बल्कि एक भयानक कैद जैसा अनुभव होता है। पांचवें महीने में चेतना जागने पर जीव को भूख-प्यास और गर्मी का अहसास होने लगता है। छठे महीने में वह कीड़े की तरह तड़पता है और असहनीय पीड़ा सहता है।

गर्भ में भगवान से की गई पुकार

महाराज जी बताते है कि इस कठिन समय में जीव को अपने पिछले जन्मों के कर्म याद आने लगते हैं। वह दुख से व्याकुल होकर भगवान से प्रार्थना करता है, "हे प्रभु! मैं बहुत अधम हूँ, मुझे एक बार इस बंधन से निकाल दीजिए, बाहर जाकर मैं केवल आपका भजन करूँगा" कहा जाता है कि उस समय भगवान जीव पर कृपा करके उसे ज्ञान देते हैं, जिससे वह अपने पापों को समझ पाता है और सुधार का संकल्प लेता है।

जन्म के साथ क्यों भूल जाता है सब?

जैसे ही जीव का जन्म होता है, माया का प्रभाव उस पर हावी हो जाता है। वही ज्ञान और वादे, जो उसने गर्भ में किए थे, सब भूल जाता है। यही कारण है कि मनुष्य फिर से संसार के मोह, भोग और इच्छाओं में उलझ जाता है और भगवान से दूर हो जाता है।

भ्रूण हत्या: एक बड़ा पाप

धार्मिक दृष्टि से भ्रूण हत्या को सबसे बड़ा अपराध माना गया है। यह केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि समाज और मानवता के खिलाफ अपराध है। शास्त्रों के अनुसार, इस पाप में तीन लोग दोषी होते हैं डॉक्टर, प्रेरित करने वाला और माता-पिता। कहा जाता है कि इस पाप से मुक्ति पाना अत्यंत कठिन है।

युवावस्था और माया का जाल

बचपन के बाद जैसे ही इंसान युवावस्था में पहुंचता है, वह अपने वादे भूलकर भोग-विलास में लग जाता है। माया इतनी शक्तिशाली है कि वह अच्छे इंसान को भी भटका देती है। इसी कारण मनुष्य सही-गलत का फर्क भूलकर गलत संगति में पड़ जाता है।

कलयुग में बचाव का एकमात्र उपाय

कलयुग के प्रभाव से बचना आसान नहीं है। लेकिन संतों के अनुसार, भगवान का नाम ही सबसे बड़ा सहारा है। निरंतर नाम जप, सत्संग और अहंकार का त्याग ही जीवन को सही दिशा दे सकता है। यही मार्ग इंसान को जन्म-मरण के चक्र से मुक्त कर सकता है।

जीवन को व्यर्थ न जाने दें

यह मानव जीवन बहुत कीमती है। गर्भ के कष्ट और भगवान से किए गए वादे को याद रखें। अगर इंसान सच्चे मन से भक्ति और अच्छे कर्मों का मार्ग अपनाए, तो वह इस जीवन को सफल बना सकता है।

UGC NET जून 2026 में बड़ी गड़बड़ी! इन 3 विषयों की परीक्षा होगी दोबारा, NTA ने जारी किया बड़ा अपडेट

Vande Mataram Controversy: साध्वी प्राची का कांग्रेस पर हमला, बोली- गांधी परिवार के डीएनए में जिन्ना का DNA

आज की ताजा खबर 16 अगस्त LIVE: वाराणसी एयरपोर्ट पर चली गोलियां; बंगाल में आशीष बनर्जी ने की आत्महत्या

ISI कनेक्शन और बड़ी साजिश! सुखबीर बादल पर हमलों को लेकर भड़कीं हरसिमरत, गृहमंत्री से की NIA जांच की मांग

Vande Mataram Controversy: सोनिया गांधी के बचाव में कांग्रेस-TMC-DMK, CPI-M ने पूछा- पार्टी का रुख क्या है?