Pitru Paksha Mein Bache Bhojan Ka Kya Kare: पितृ पक्ष में पूर्वजों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा है। इस दौरान घरों में पितरों के निमित्त सात्विक भोजन बनाया जाता है और ब्राह्मणों या जरूरतमंद लोगों को भोजन कराने के साथ गाय, कौए और कुत्ते के लिए भी अन्न निकालने की परंपरा है। लेकिन कई बार श्राद्ध के बाद खाना बच जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि इस बचे हुए भोजन का क्या करें? क्या इसे घर के लोग खा सकते हैं या इसे फेंक देना चाहिए? आइए जानते हैं इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं।
धार्मिक परंपराओं में अन्न को सम्मान देने की बात कही गई है। इसलिए श्राद्ध के लिए बनाया गया भोजन भी बेवजह कूड़े में फेंकने से बचना चाहिए। कोशिश यही होनी चाहिए कि उतना ही भोजन बनाया जाए, जितने की जरूरत हो। इससे अन्न की बर्बादी भी नहीं होगी और बाद में बचे भोजन को लेकर दुविधा भी नहीं रहेगी।
अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इसे लेकर परंपराएं अलग हो सकती हैं। आमतौर पर पितरों, ब्राह्मणों और पंचबलि के लिए हिस्सा निकालने के बाद बचा हुआ सात्विक भोजन परिवार के सदस्य प्रसाद की भावना से ग्रहण करते हैं। हालांकि जिस परिवार में श्राद्ध को लेकर कोई विशेष कुल परंपरा चली आ रही हो, वहां उसी का पालन करना बेहतर माना जाता है।
अगर भोजन साफ, ताजा और खाने योग्य है तो उसे किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दिया जा सकता है। कई परिवार श्राद्ध के दिन गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन कराने को पुण्य का काम मानते हैं। ध्यान रखें कि किसी को भी खराब, बासी या लंबे समय से रखा हुआ खाना नहीं देना चाहिए।
श्राद्ध की परंपरा में भोजन का एक हिस्सा गाय, कौए और कुत्ते के लिए निकालने की मान्यता भी है। इसे पंचबलि परंपरा से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि पूरा बचा हुआ भोजन पशु-पक्षियों के सामने डाल दिया जाए। उन्हें वही चीज और उतनी ही मात्रा में दें जो उनके लिए सुरक्षित हो।
इसलिए श्राद्ध में सबसे अच्छा तरीका यही है कि भोजन जरूरत के हिसाब से बनाया जाए। जो भोजन बच जाए, उसका सम्मानपूर्वक उपयोग किया जाए और अन्न की बर्बादी न होने दी जाए।