

Panchbali Bhog In Shraddh: पितृ पक्ष में पूर्वजों के लिए श्राद्ध और तर्पण की परंपरा निभाई जाती हैं, इन्हीं में से एक है पंचबलि कर्म। श्राद्ध का भोजन परोसने से पहले उसमें से सबसे पहले कुछ हिस्सा गाय, कुत्ते, कौए और चींटियों के लिए अलग निकाला जाता है। लेकिन जानवरों व पक्षियों को खाना परोसने के पीछे क्या है वजह?
पंचबलि दो शब्दों से मिलकर बना है- पंच यानी पांच और बलि का अर्थ है अर्पण। श्राद्ध कर्म में भोजन का एक हिस्सा पांच अलग-अलग रूपों में अर्पित करने की परंपरा को पंचबलि कहा जाता है। इसमें गाय, कुत्ता, कौआ, देवता और चींटी के लिए भोजन निकाला जाता है।
माना जाता है कि श्राद्ध पक्ष में पूर्वज इन्हीं रूपों में धरती पर आते हैं और इन्हीं पक्षियों व जानवरों के जरिए उन तक यह भोजन पहुंचते हैं। पंचबलि के जरिए पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है और उनकी तृप्ति की कामना की जाती है।
पंचबलि में गाय के लिए निकाले जाने वाले भोजन को गौ बलि या गौ ग्रास कहा जाता है। हिंदू परंपरा में गाय को पवित्र माना गया है। मान्यता है कि गाय को भोजन अर्पित करने से पितरों की तृप्ति और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
श्राद्ध के भोजन में कौए को भोजन देने का महत्व है। इसे काक बलि कहा जाता है। कौए को पितरों का रूप माना गया है। इसी वजह से श्राद्ध का भोजन कौए को खिलाने की परंपरा है और ऐसा पितरों की तृप्ति के लिए जरूरी होता है।
पंचबलि में कुत्ते के लिए निकाले जाने वाले भोजन को श्वान बलि कहा जाता है। कुत्ते का संबंध यमराज से जोड़ा जाता है। इसलिए श्राद्ध में कुत्ते को भोजन कराने की परंपरा भी खास मानी जाती है।
पंचबलि में छोटे जीवों, खासकर चींटियों के लिए भी भोजन निकाला जाता है। इसे पिपीलिकादि बलि कहा जाता है। चींटियों को भोजन कराना पुण्यकारी माना जाता है। कई जगह आटा, शक्कर या मीठा भोजन चींटियों के लिए रखा जाता है।
पंचबलि का एक हिस्सा देवताओं के लिए भी अर्पित किया जाता है, जिसे देव बलि कहा जाता है। इस तरह पंचबलि भोग में केवल जीव-जंतुओं के लिए ही नहीं, बल्कि देवताओं के लिए भी भोजन का एक अंश निकाला जाता है।
पंचबलि की परंपरा का मूल भाव केवल भोजन बांटना नहीं, बल्कि पितरों का स्मरण और जीवों के प्रति करुणा की भावना से जुड़ा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इन पांचों को भोजन अर्पित करने से पितरों को तृप्ति मिलती है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है।