पिठोरी अमावस्या फोटो.सोशल मीडिया
धर्म

Pithori Amavasya 2026: कुशा से 64 योगिनियों की पूजा तक, जानें पिठोरी अमावस्या की परंपरा और स्नान-दान की वजह

Pithori Amavasya Muhurat: पिठोरी अमावस्या पर स्नान-दान के साथ पितरों के तर्पण और 64 योगिनियों की पूजा की खास परंपरा है। माताएं संतान की सुख-समृद्धि और लंबी उम्र की कामना से व्रत रखती हैं।

रीता राय सागर

Pithori Amavasya 2026: भाद्रपद की अमावस्या पर पितरों के तर्पण और स्नान-दान की परंपरा है, लेकिन पिठोरी अमावस्या के दिन माताएं अपनी संतना की खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं। इस दिन कुशा से जुड़ी एक खास परंपरा है और माताएं संतान की सुख-समृद्धि की कामना से व्रत रखती हैं। जानिए इस दिन को खास बनाने वाले नियमों और पूजा का सही समय।

इस बार कब मनाई जाएगी पिठोरी अमावस्या?

पिठोरी अमावस्या दो तारीखों में पड़ रहा है। पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 10 सितंबर 2026 की सुबह 10:33 बजे शुरू होगी और 11 सितंबर की सुबह 8:56 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर पिठोरी अमावस्या 10 सितंबर को ही मनाई जाएगी।

इस अमावस्या की सबसे खास बात है कुशा

पिठोरी अमावस्या को कुशग्रहणी अमावस्या भी कहा जाता है, इसलिए इस व्रत में कुशा का खास महत्व है। कुशा का इस्तेमाल पूजा-पाठ, तर्पण और दूसरे अनुष्ठानों में किया जाता है। कुशग्रहणी अमावस्या के दिन कुशा एकत्र करके रखी जाती है और फिर पूरे साल धार्मिक कार्यों में इसका इस्तेमाल किया जाता है। कुशा बहुत पतली, लंबी और नुकीली होती हैं और यह गुच्छे में उगती है।

आटे से बनाई जाती हैं 64 योगिनियां

इस दिन की पूजा में 64 योगिनियों और सप्तमातृकाओं का पूजन किया जाता है। पूजा के लिए चावल के आटे से इनकी प्रतीकात्मक आकृतियां बनाई जाती हैं। इन्हें लाल कपड़े पर स्थापित करके गणेश जी की पूजा की जाती है। इसके बाद रोली, हल्दी, कुमकुम, दूर्वा, लाल फूल और सुहाग की सामग्री अर्पित करके पूजा का समापन किया जाता है।

पूजा के लिए बनते घर पर विशेष पकवान

पिठोरी अमावस्या की पूजा सिर्फ मंत्र और सामग्री तक सीमित नहीं है। पूजा के बाद आटे से बने पकवान और खीर-पूरी का भोग लगाया जाता है। इसके बाद व्रत की कथा सुनी जाती है और आरती की जाती है।

तर्पण के लिए भी खास है यह दिन

अमावस्या होने के कारण पितरों का स्मरण और तर्पण भी इस दिन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पिठोरी अमावस्या पर पितरों की शांति के लिए तर्पण और पिंडदान किया जाता है। 10 सितंबर को तर्पण और पिंडदान का शुभ समय सुबह 11:45 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक का है।

स्नान-दान कब करें?

अगर आप पिठोरी अमावस्या पर स्नान और दान करना चाहते हैं, तो सुबह 4:31 बजे से 5:17 बजे तक का समय बताया गया है। वहीं पूजा के लिए सुबह 6:07 बजे से 9:18 बजे तक का समय शुभ है।

पीपल और शिव पूजा से भी जुड़ी परंपरा

कुशग्रहणी अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाया जाता है, इसे पितरों को शांति मिलती है। साथ ही पिठोरी अमावस्या के दिन पीपल के नीचे पितरों के नाम का दीपक भी जलाया जाता है।   

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