Pithori Amavasya Religious Significance: हिंदू माताएं संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन के लिए कई तरह के व्रत रखती हैं। पिठोरी अमावस्या भी ऐसा ही एक पर्व है, जिसे संतान के कल्याण और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है। इस साल पिठोरी अमावस्या 10 सितंबर, गुरुवार को मनाई जाएगी। इस शुभ अवसर पर 64 योगिनियों की पूजा की जाती है।
धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि इस व्रत के पुण्य-प्रताप से व्रती के सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। साथ ही जीवन में व्याप्त हर परेशानी दूर हो जाती है। पिठोरी अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण और पिंडदान भी किया जाता है। आइए, पिठोरी अमावस्या की सही डेट और शुभ मुहूर्त जानते हैं-
पंचांग के अनुसार, पिठोरी अमावस्या भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। इस वर्ष अमावस्या 10 सितंबर, गुरुवार को मनाई जाएगी। अलग-अलग क्षेत्रों में इस पर्व को स्थानीय परंपराओं के अनुसार अलग नामों से भी जाना जाता है। महाराष्ट्र और कुछ अन्य क्षेत्रों में इससे जुड़ी लोक परंपराएं विशेष रूप से प्रचलित हैं।
पिठोरी अमावस्या की तारीख: 10 सितंबर 2026, गुरुवार
अमावस्या तिथि प्रारंभ: 9 सितंबर 2026 की रात 11:20 बजे
अमावस्या तिथि समाप्त: 10 सितंबर 2026 की रात 9:45 बजे
पूजा के लिए शुभ समय: सुबह 6:07 बजे से 9:18 बजे तक
पितृ तर्पण और दान का समय: दोपहर 11:45 बजे से 1:30 बजे तक
सनातन धर्म में पिठोरी अमावस्या का धार्मिक महत्व है। हिन्दू धर्म शास्त्रों में पिठोरी अमावस्या को मातृशक्ति और संतान के बीच प्रेम एवं आस्था का प्रतीक बताया गया
है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक देवी-देवताओं की पूजा और व्रत करने से संतान के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
बताया जाता है कि, अमावस्या तिथि होने के कारण इस दिन पितरों के लिए तर्पण, दान और प्रार्थना भी की जाती है। कहा जाता है कि, इससे परिवार की सुख-शांति और पूर्वजों का असीम कृपा बनी रहती है।