ओणम साध्या फोटो.सोशल मीडिया
धर्म

Onam Sadya: केले के पत्ते पर इतने सारे पकवान क्यों परोसे? जानें ओणम पर परोसे जाने वाले व्यंजन के असली मायने

Onam Festival: ओणम के मौके पर परोसा जाने वाला साध्या केरल की समृद्ध खानपान का हिस्सा है, जिसमें केले के पत्ते पर कई तरह के व्यंजन परोसे जाते हैं। जानें साध्या में इतने पकवान क्यों परोसे जाते हैं।

रीता राय सागर

Onam Sadya Dishes: ओणम में केले के पत्ते पर परोसे जाने वाले भोजन को साध्या कहते हैं, जो सिर्फ एक पारंपरिक भोज नहीं, बल्कि केरल की संस्कृति, परंपरा और सामूहिकता का खूबसूरत प्रतीक है। केले के पत्ते पर एक साथ इतने सारे व्यंजन परोसने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है।  

साध्या में परोसे जाने वाले हर पकवान का अपना स्वाद और सांस्कृतिक महत्व है। दाल, सब्जी और अचार से लेकर पायसम तक, यह पूरा भोजन केरल की विविधता, संतुलन, समृद्धि और साथ मिलकर मनाए जाने वाले उत्सव की भावना को दर्शाता है।

ओणम साध्या क्या है?

ओणम केरल का प्रमुख फसल उत्सव है और साध्या इस पर्व की सबसे खास परंपराओं में शामिल है। मलयालम में साध्या का अर्थ दावत या भोज होता है। यह पारंपरिक रूप से केले के पत्ते पर परोसा जाने वाला शाकाहारी भोजन है, जिसमें कई तरह के व्यंजन एक साथ परोसे जाते हैं, जिसका स्वाद अविस्मरणीय होता है।

इतने सारे पकवान क्यों होते हैं?

साध्या की खासियत केवल ज्यादा व्यंजन होना नहीं, बल्कि इस भोजन में स्वाद के साथ विविधता और संतुलन को भी शामिल करना है। इसमें चावल, दाल, सब्जियां, दही आधारित व्यंजन, अचार, पापड़ और मिठाइयां शामिल होती हैं। अलग-अलग व्यंजनों के स्वाद, उनके बनाने के तरीके और रंग मिलकर एक पूरा पारंपरिक भोज बनाते हैं।

क्या साध्या में हमेशा 26 पकवान होते हैं?

साध्या में व्यंजनों की संख्या तय नहीं होती। आज कई जगह करीब 20 से 28 या उससे अधिक पकवान परोसे जाते हैं, जबकि पुराने समय में इससे भी अधिक पकवान शामिल किए जाते थे।

परिप्पु और घी से होती है शुरुआत

चावल के साथ परिप्पु यानी दाल और घी साध्या के शुरुआती महत्वपूर्ण भोजन में शामिल हैं। यह भोजन को सरल और पारंपरिक शुरुआत देता है। इसके बाद सांभर जैसे व्यंजन परोसे जाते हैं।

अवियल, थोरन और ओलन क्यों खास हैं?

अवियल कई सब्जियों और नारियल से तैयार पारंपरिक सब्जी है। थोरन सब्जियों को नारियल के साथ तैयार करने वाली शैली है, जबकि ओलन साध्या के हल्के और अलग स्वाद वाले व्यंजनों में शामिल है। ये पकवान केरल की पारंपरिक शाकाहारी रसोई की विविधता को दिखाते हैं।

खट्टे-मीठे स्वाद के लिए अचार और इंची-पुली

साध्या में अचार और इंची-पुली यानी अदरक और इमली से बना खट्टा-तीखे स्वाद की चटनी भोजन में अलग ही स्वाद देता है। नींबू, आम और अदरक के अचार जैसी चीजें भी साध्या में शामिल होती हैं।

पापड़, केले के चिप्स और शर्करा वरट्टी

साध्या में केवल करी और सब्जियां ही नहीं होतीं। पापड़, केले के चिप्स और शर्करा वरट्टी जैसे कुरकुरे और मीठे-नमकीन स्वाद वाले पकवान भी परोसे जाते हैं। इससे भोजन में अलग-अलग स्वाद जुड़ते हैं।

पचड़ी और किचड़ी का स्वाद

पचड़ी और किचड़ी जैसे दही आधारित व्यंजन साध्या में ठंडे, खट्टे और हल्के स्वाद का बैलेंस बनाते हैं। अलग-अलग परिवारों में इनके रूप और सामग्री में बदलाव हो सकता है। यही विविधता साध्या को और खास बनाती है।

आखिर में क्यों आती है पायसम?

साध्या का सबसे पसंदीदा हिस्सा पायसम माना जाता है। यह खाने के बाद अंत में परोसा जाने वाला एक तरह का स्वीट डिश है। पायसम कई प्रकार के होते हैं। दूध, चावल, दाल या सेवई से बने अलग-अलग पायसम परंपरा का हिस्सा होते हैं।

हर व्यंजन मिलकर बनाता है पूरी साध्या

परिप्पु से लेकर सांभर, अवियल, थोरन, ओलन, अचार, पापड़ और पायसम तक- साध्या में हर चीज अकेले मुख्य आकर्षण बनने के बजाय पूरे भोजन का हिस्सा है। यही विविधता ओणम को अन्य त्योहारों से अलग बनाता है। इसकी खासियत बड़ी थाली नहीं, बल्कि केरल की खाद्य और सांस्कृतिक परंपरा के साथ सामूहिकता में है।

साध्या में परोसे जाने वाले व्यंजन

इनमें परिप्पू, पापड़, घी, सांभर, कालन, रसम, मोरू, अवियल, थोरन, एरिसरी, ओलन, खिचड़ी, पचड़ी, कूटू करी , अदरक, नींबू और आम का अचार, केले के चिप्स, सरकारवरट्टी , अडा, दाल, सेवई और चावल से बने पायसम शामिल हैं । 

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