नवंबर 2026 की पहली कालाष्टमी 1 नवंबर, रविवार को मनाई जाएगी।
कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 1 नवंबर को दोपहर 2:51 बजे शुरू होकर 2 नवंबर को दोपहर 1:10 बजे समाप्त होगी।
कालाष्टमी पर भगवान काल भैरव की पूजा-अर्चना की जाती है।
पूजा में दीपक, धूप, फूल, फल और प्रसाद अर्पित करने की परंपरा है।
दिसंबर की अगली कालाष्टमी 1 दिसंबर को काल भैरव जयंती के रूप में मनाई जाएगी।
Kalashtami Date 2026: कालाष्टमी भगवान काल भैरव को समर्पित एक महत्वपूर्ण मासिक व्रत है। यह हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। इस दिन भक्त भगवान काल भैरव की पूजा-अर्चना करते हैं और सुख-शांति की कामना करते हैं। नवंबर 2026 में कालाष्टमी की तारीखों को लेकर जानना चाहते हैं, तो यहां इसकी तिथि, पूजा विधि और धार्मिक महत्व से जुड़ी जानकारी आसान भाषा में दी गई है।
पंचांग के अनुसार, नवंबर 2026 में मासिक कालाष्टमी 1 नवंबर, रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि दोपहर 2 बजकर 51 मिनट से शुरू होकर 2 नवंबर को दोपहर 1 बजकर 10 मिनट तक रहेगी।
इसलिए व्रत और पूजा की तैयारी करते समय अपने शहर के स्थानीय पंचांग को भी देखना उचित रहेगा। नवंबर के बाद अगली कालाष्टमी 1 दिसंबर 2026 को पड़ेगी। इसी दिन काल भैरव जयंती भी मनाई जाएगी।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान काल भैरव को भगवान शिव का रौद्र स्वरूप माना जाता है। उन्हें समय, अनुशासन और धर्म की रक्षा से जोड़कर देखा जाता है। कालाष्टमी पर भक्त उनकी आराधना कर जीवन में सुख-शांति और सकारात्मकता की कामना करते हैं। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक पूजा और प्रार्थना करने से मन में साहस और आत्मविश्वास बढ़ाने की प्रेरणा मिलती है।
कालाष्टमी के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई कर भगवान काल भैरव का स्मरण करें। उनकी प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं और फूल अर्पित करें। इसके बाद धूप, फल और अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग लगाएं। पूजा के दौरान भगवान शिव और काल भैरव के मंत्रों का जाप भी किया जा सकता है। अंत में आरती करके परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
पूजा करते समय मन में श्रद्धा और शांति बनाए रखें। जरूरतमंद लोगों की सहायता करना और पशु-पक्षियों के प्रति दया का भाव रखना भी इस दिन अच्छे कर्मों से जुड़ा माना जाता है। पूजा की सामग्री में दीपक, धूप, फूल, फल और प्रसाद रख सकते हैं। व्रत रखने वाले लोग अपनी सेहत और सुविधा के अनुसार फलाहार या सात्विक भोजन का चुनाव कर सकते हैं।
कालाष्टमी केवल व्रत रखने का दिन नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और अच्छे आचरण का अवसर भी है। इस दिन भक्त भगवान काल भैरव से सही मार्ग पर चलने, बुरे विचारों से दूर रहने और अपने कर्तव्यों का पालन करने की प्रेरणा मांगते हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में पूजा की परंपराएं और विधियां थोड़ी भिन्न हो सकती हैं। इसलिए स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा करना उचित रहता है।