Nag Panchami Par Gudiyan Kyon Peette Hain : सावन के पवित्र महीने में कई सारे व्रत और त्योहार आते हैं और इनमें से लगभग सभी व्रत भगवान शिव से जुड़े हुए होते हैं। इन्हीं में से एक है महादेव के गले का श्रृंगार कहे जाने वाले नागदेव से जुड़ा पर्व नागपंचमी। जो कि इस बार सावन के तीसरे सोमवार यानी 17 अगस्त को मनाया जाएगा।
देश के कुछ हिस्सों में नाग पंचमी से जुड़ी एक ऐसी अनोखी परंपरा भी देखने को मिलती है, जिसे सुनकर लोग हैरान रह जाते हैं। आपको बता दें, इस रस्म में गुड़िया को पीटने की परंपरा निभाई जाती हैं। जी हां, आपने सही सुना। आइए जानते हैं आखिर इस रस्म के पीछे क्या मान्यता है और इसका नाग देवता से क्या संबंध है?
उत्तर भारत के कई हिस्सों खासकर, उत्तर प्रदेश और बिहार में यह परंपरा का उल्लेख मिलता हैं। नाग पंचमी के दिन कपड़े की गुड़िया बनाकर पीटने की एक अनोखी लोक परंपरा है। इस रस्म का सीधा संबंध नागों की रक्षा, अनजाने में हुए पाप के प्रायश्चित और लोक कथाओं से जुड़ा है, जहाँ जीवित प्राणी को चोट पहुँचाने के बजाय प्रतीकात्मक रूप से गुड़िया को पीटा जाता है।
लोक कथा के अनुसार, एक बार एक बहन ने अनजाने में खेत या घर के पास एक नाग के बच्चे को मार दिया था। जब लोगों और समाज को इसका पता चला, तो उन्होंने इसे नाग देवता का अपमान माना।
प्रायश्चित के तौर पर उस लड़की को समाज द्वारा प्रतीकात्मक सजा देने का विधान बना। बाद में यह तय हुआ कि भविष्य में वास्तविक इंसान को दंडित करने की बजाय कपड़े की गुड़िया बनाकर उसे पीटा जाएगा।
मान्यता है कि इस रस्म को निभाने से नाग देवता का गुस्सा शांत होता है, सर्प वध के पाप से मुक्ति मिलती है और घर-परिवार पर नागों की कृपा बनी रहती है।
इस दिन सुहागिनें और युवतियां पुराने कपड़ों से रंग-बिरंगी गुड़िया बनाती हैं और उन्हें चौराहे या रास्तों पर डालती हैं।
बच्चे और महिलाएं उस गुड़िया को छड़ी या जूतों से पीटते हैं।
यह परंपरा पर्यावरण और जीवों के प्रति करुणा का संदेश देती है कि हमें सांप जैसे वन्य जीवों को नुकसान नहीं पहुँचाना चाहिए।