Khatu Shyam (Source. Pinterest) 
धर्म

महाभारत का सबसे रहस्यमयी योद्धा, जिसने युद्ध से पहले ही दे दिया अपना सिर, कहानी जो कर देगी रोंगटे खड़े

Who was Barbarik: महाभारत के 18 दिन के युद्ध की कहानियां हम बचपन से सुनते आए हैं, लेकिन इस महायुद्ध के कई ऐसे रहस्य हैं, जो आज भी कम ही लोगों को पता हैं।

सिमरन सिंह

Khatu Shyam Story: महाभारत के 18 दिन के युद्ध की कहानियां हम बचपन से सुनते आए हैं, लेकिन इस महायुद्ध के कई ऐसे रहस्य हैं, जो आज भी कम ही लोगों को पता हैं। उन्हीं में से एक है भीम के पोते और घटोत्कच के पुत्र बरबरीक की अनोखी कहानी, जिसे सुनकर आप हैरान रह जाएंगे।

कौन थे बरबरीक?

बरबरीक एक महान और पराक्रमी योद्धा थे, जिन्होंने बचपन से ही युद्ध कौशल में महारत हासिल कर ली थी। उनकी मां ने उन्हें एक खास शिक्षा दी थी वह हमेशा युद्ध में कमजोर पक्ष का साथ देंगे। "उनकी मां ने उसे यही सिखाया था कि वो हमेशा हारने वाले की तरफ से लड़ाई लड़ेंगे।" यही वचन आगे चलकर उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ बना।

तीन बाणों की अद्भुत शक्ति

बरबरीक ने मां दुर्गा की कठोर तपस्या कर उन्हें प्रसन्न किया और तीन दिव्य बाण प्राप्त किए। इसी कारण उन्हें "तीन बाण धारी" कहा जाता है। कहा जाता है कि उनके ये तीन बाण इतने शक्तिशाली थे कि वे पलक झपकते ही पूरी सेना का विनाश कर सकते थे। अग्निदेव ने उन्हें एक दिव्य धनुष भी प्रदान किया, जिससे वे तीनों लोकों में विजयी हो सकते थे।

कृष्ण से हुई अनोखी परीक्षा

जब बरबरीक महाभारत युद्ध में शामिल होने जा रहे थे, तब भगवान श्री कृष्ण ने ब्राह्मण का रूप धारण कर उन्हें रोका। कृष्ण ने उनकी परीक्षा लेने के लिए कहा कि पीपल के पेड़ के सभी पत्तों को एक ही बाण से भेदकर दिखाएं। बरबरीक ने ऐसा कर दिखाया। "मेरे मात्र एक बाण हीं शत्रु को परास्त करने के लिए पर्याप्त है।" यह देखकर कृष्ण भी उनकी शक्ति से प्रभावित हो गए।

वचन बना सबसे बड़ी वजह

जब कृष्ण ने उनसे पूछा कि वह किस पक्ष से युद्ध लड़ेंगे, तो बरबरीक ने कहा कि वह कमजोर पक्ष का साथ देंगे। "वो युद्ध में कमजोर पक्ष की ओर से लड़ाई लड़ेंगे।" कृष्ण जानते थे कि अगर बरबरीक युद्ध में उतरे, तो वह हर बार पक्ष बदलकर युद्ध का परिणाम बदल सकते हैं।

दान में मांगा गया शीश

युद्ध के संतुलन को बनाए रखने के लिए कृष्ण ने उनसे दान में उनका सिर मांग लिया। बरबरीक ने अपना वचन निभाते हुए बिना हिचकिचाए अपना शीश दान कर दिया। हालांकि उन्होंने एक इच्छा रखी कि वह पूरा युद्ध देखना चाहते हैं, जिसे कृष्ण ने स्वीकार कर लिया।

आज भी होते हैं खाटू श्याम के नाम से पूजे

बरबरीक का शीश युद्धभूमि के पास एक पहाड़ी पर स्थापित किया गया, जहां से उन्होंने पूरा महाभारत युद्ध देखा। उनकी वीरता से प्रभावित होकर भगवान कृष्ण ने उन्हें "श्याम" नाम दिया। आज उन्हें खाटू श्याम बाबा के रूप में पूजा जाता है और लाखों भक्त उनके दर्शन के लिए आते हैं।

ध्यान दें

बरबरीक की कहानी हमें त्याग, वचन और धर्म की अनोखी मिसाल देती है। उन्होंने अपनी शक्ति से ज्यादा अपने वचन को महत्व दिया और इतिहास में अमर हो गए। यह कहानी सिखाती है कि असली महानता बल में नहीं, बल्कि त्याग और सच्चाई में होती है।

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