मंगला गौरी व्रत (सौ.AI) 
धर्म

Mangla Gauri Vrat 2026: 4 अगस्त को पहला मंगला गौरी व्रत, सुहागिनों के लिए बेहद खास दिन जानें शुभ योग

Mangla Gauri Vrat: मंगला गौरी व्रत 2026 का पहला व्रत 4 अगस्त को रखा जाएगा। यह दिन सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। जानें शुभ योग, पूजा का सही समय, धार्मिक महत्व के बारे में।

सीमा कुमारी

First Mangala Gauri Vrat 2026: आज, 30 जुलाई से सावन महीने की शुरुआत हो चुकी है। इस महीने हर मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। इस बार सावन का पहला मंगलवार 4 अगस्त को है। इस वर्ष सावन के पहले मंगला गौरी व्रत पर तीन शुभ योगों का संयोग बन रहा है, जो इसे और भी खास बना देता है। जिन नवविवाहित महिलाओं का यह पहला सावन है, उनके लिए इस व्रत से जुड़े कुछ विशेष नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करना शुभ माना जाता है।

कब है पहला मंगला गौरी व्रत?

साल 2026 में सावन का पहला मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त को पड़ेगा। पंचांग के अनुसार इस दिन सावन माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि रहेगी, जो रात 10:03 बजे तक प्रभावी होगी।

3 शुभ योग में पहला मंगला गौरी व्रत

इस दिन तीन शुभ योगों का निर्माण हो रहा है, सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और रवि योग। ये सभी योग रात 9:54 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन 5 अगस्त की सुबह 5:45 बजे तक रहेंगे। वहीं, दिन के समय धृति योग सुबह से लेकर शाम 7:33 बजे तक रहेगा, इसके बाद शूल योग प्रारंभ होगा। नक्षत्रों की बात करें तो रेवती नक्षत्र सुबह से रात 9:54 बजे तक रहेगा, जिसके बाद अश्विनी नक्षत्र शुरू होगा।

सुहागिन महिलाओं के लिए क्यों खास है मंगला गौरी व्रत?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हिंदू धर्म में मंगला गौरी व्रत का बड़ा महत्व बताया गया हैं। इस व्रत को महिलाए पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और दांपत्य जीवन में प्रेम और सामंजस्य बनाए रखने के लिए रखती हैं। इसके अलावा, कुंवारी कन्याएं भी मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए यह व्रत करती हैं। बताया जाता है कि, इस व्रत को रखने से कुंडली का मंगल दोष और संतान संबंधी समस्याएं भी दूर होती हैं।

  • पूजा का शुभ समय

पूजा के लिए शुभ समय की बात करें तो इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:20 बजे से 5:02 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:54 बजे तक है। सामान्य रूप से पूजा का उपयुक्त समय सुबह 9:06 बजे से दोपहर 2:08 बजे के बीच रहेगा। सूर्यास्त शाम 7:10 बजे होगा, इसलिए जिन स्थानों पर प्रदोष काल में पूजा की परंपरा है, वे सूर्यास्त के बाद पूजा कर सकते हैं।

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  • मंगला गौरी व्रत के नियम

नवविवाहित महिलाओं के लिए मंगला गौरी व्रत से जुड़े विशेष नियम भी हैं। परंपरा के अनुसार, विवाह के बाद पहला सावन होने पर यह व्रत मायके में रखा जाता है। इसके बाद अगले चार वर्षों तक इसे ससुराल में करना चाहिए। कुल मिलाकर इस व्रत को लगातार पांच वर्षों तक करना शुभ माना गया है।

  • भद्रा और पंचक का साया

पहले मंगला गौरी व्रत के दिन भद्रा और पंचक का भी संयोग रहेगा। भद्रा रात 10:03 बजे से शुरू होकर अगले दिन सुबह 5:45 बजे तक रहेगी, लेकिन इसका प्रभाव स्वर्ग लोक में होने के कारण अशुभ नहीं माना जाएगा। वहीं पंचक सुबह 5:44 बजे से रात 9:54 बजे तक रहेगा, जिसे चोर पंचक कहा जाता है। इस दौरान अपने कीमती सामान की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

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