नवरात्रि के नौंवे दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।
मान्यता है कि उनकी कृपा से भगवान शिव को आठ सिद्धियां प्राप्त हुईं।
अर्धनारीश्वर रूप में शिव के आधे शरीर में माता पार्वती विराजमान हैं।
शिव पुराण में इस रूप का संबंध सृष्टि के विस्तार से भी बताया गया है।
Maa Siddhidatri Katha: नवरात्रि के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। नवदुर्गा के इस स्वरूप को सिद्धियां प्रदान करने वाली देवी कहा गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव ने भी मां आदिशक्ति की आराधना की थी, इसके बाद ही उन्हें सिद्धियां प्राप्त हुई थीं। इसी प्रसंग से मां सिद्धिदात्री और भगवान शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप का संबंध है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अर्धनारीश्वर रूप की कथा सृष्टि की रचना से भी जुड़ी हुई है?
मां सिद्धिदात्री की कृपा से भगवान शिव को आठ सिद्धियां प्राप्त हुई। इन्हें अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व कहा जाता है। इन सिद्धियों के कारण शिव के इस स्वरूप को विशेष महत्व दिया जाता है।
इसी मान्यता के अनुसार, देवी की कृपा से भगवान शिव के शरीर का आधा भाग स्त्री स्वरूप में प्रकट हुआ। इस तरह शिव और शक्ति एक ही शरीर में समाहित हुए। इसी दिव्य स्वरूप को अर्धनारीश्वर कहा जाता है।
शिव पुराण में अर्धनारीश्वर स्वरूप से जुड़ा एक प्रसंग है, जिसे सृष्टि के निर्माण से संबंधित बताया जाता है। कथा के अनुसार, ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की, लेकिन इसका विस्तार करने के लिए भगवान शिव की आराधना की गई।
ब्रह्मा जी की प्रार्थना से प्रसन्न होकर भगवान शिव उनके सामने अर्धनारीश्वर स्वरूप में प्रकट हुए। इस रूप में उनके शरीर का दायां भाग पुरुष और बायां भाग स्त्री का था। इसके बाद शिव के स्त्री स्वरूप से देवी शक्ति प्रकट हुईं। ब्रह्मा जी ने उनसे सृष्टि के विस्तार में सहायता मांगी।
कथा के अनुसार, देवी ने उनकी प्रार्थना स्वीकार की और सृष्टि के विस्तार का मार्ग प्रशस्त हुआ। इस कथा में अर्धनारीश्वर स्वरूप को शिव और शक्ति के एकत्व और सृष्टि के शुरुआत से जोड़ा जाता है।
अर्धनारीश्वर स्वरूप में भगवान शिव और माता पार्वती एक ही शरीर के दो भाग हैं। शिव के भाग में जटाएं, त्रिशूल और पुरुष रूप के चिह्न दिखते हैं, जबकि देवी के भाग में आभूषण, स्त्री स्वरूप के चिह्न और कमल जैसे प्रतीक दिखाई देते हैं। यह शिव और शक्ति की एकता का प्रतीक है। शिव को चेतना और शक्ति को सृजनकारी ऊर्जा माना जाता है।
नवदुर्गा परंपरा में मां सिद्धिदात्री को भक्तों को सिद्धियां और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करने वाली देवी माना जाता है। नवरात्रि के नौवें दिन भक्त उनकी पूजा करके सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना करते हैं।
अर्धनारीश्वर की कथा के साथ मां सिद्धिदात्री का संबंध इस बात को रेखांकित करता है कि देवी शक्ति को सृष्टि और शिव के स्वरूप से अलग करके नहीं देखा जाता। यही कारण है कि नवरात्रि में मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ शक्ति के महत्व और शिव-शक्ति के एकत्व को भी याद किया जाता है।