Highlights:
मां चंद्रघंटा के माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है।
उनके स्वरूप में शांति, साहस और बुरी शक्तियों से रक्षा का संदेश मिलता है।
नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के इसी स्वरूप की पूजा की जाती है।
Maa Chandraghanta Significance: नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। मां के इस स्वरूप में माथे पर सुशोभित अर्धचंद्र सबसे खास है। माता के माथे पर सुशोभित चंद्रमा सामान्य चंद्रमा नहीं, बल्कि घंटे के आकार का दिखाई देता है। इसी विशेषता के कारण देवी को चंद्रघंटा कहा जाता है। उनका यह रूप साहस, शक्ति और शांति का प्रतीक है।
मां के नाम को दो शब्दों से समझा जा सकता है- चंद्र और घंटा। चंद्र का अर्थ है चंद्रमा और घंटा का अर्थ है मंदिर में बजाई जाने वाली घंटी। मां के माथे पर मौजूद अर्धचंद्र का आकार घंटे जैसा होने के कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। देवी पार्वती ने भगवान शिव से विवाह के बाद अपने मस्तक पर अर्धचंद्र को धारण किया था। इसी स्वरूप को मां चंद्रघंटा के रूप में जाना जाता है।
मां चंद्रघंटा का स्वरूप केवल एक आभूषण नहीं है। उनके नाम में शामिल घंटा जागरूकता और नकारात्मक शक्तियों को दूर करने का प्रतीक का है। वहीं, चंद्रमा को शीतलता और मन की शांति से जोड़ा जाता है।
इस तरह मां का स्वरूप यह संदेश देता है कि जीवन में साहस के साथ मन की शांति बनाए रखना भी जरूरी है। जीवन में कठिन परिस्थितियों का सामना करते समय धैर्य और दृढ़ता दोनों की जरूरत होती है।
मां चंद्रघंटा की दस भुजाओं में त्रिशूल, तलवार, धनुष, बाण, गदा, कमंडल, कमल और जपमाला जैसे अलग-अलग प्रतीक दिखाई देते हैं। कुछ हाथ अभय और वरद मुद्रा में भी दिखाई देते हैं। मां की 10 भुजाओं में समाहित अस्त्र-शस्त्र शक्ति और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करना सीखाते हैं, जबकि अभय मुद्रा भक्तों को निडर रहने का संदेश देती है। इस रूप में देवी की शक्ति और करुणा दोनों का संगम दिखाई देता है।
मां चंद्रघंटा को सिंह या बाघ पर सवार दिखाया जाता है। यह वाहन उनके निर्भीक और शक्तिशाली स्वरूप को दर्शाता है। देवी के हाथों में अस्त्र-शस्त्र और उनके वाहन के रूप में सिंह की सवारी यह बताता है कि वे दुष्ट शक्तियों से मुकाबला करने के लिए सदैव तैयार हैं। उनका स्वरूप भक्तों को यह प्रेरणा देता है कि भय के सामने हार मानने के बजाय साहस और विवेक से काम लेना चाहिए।
नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। इसी क्रम में तीसरा दिन मां चंद्रघंटा को समर्पित है। भक्त इस दिन देवी की आराधना करके साहस, शांति और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।