Kurma Jayanti Date And Time: सनातन धर्म में वैशाख महीने की पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन कूर्म जयंती भी मनाई जाती है। जो कि इस साल 1 मई 2026 को मनाई जाएगी। कूर्म जयंती भगवान विष्णु के प्रमुख अवतारों में से एक माना जाता है।
सनातन धर्म में कूर्म जयंती का बड़ा महत्व बताया गया है। कूर्म यानी कछुआ, अवतार धैर्य, शक्ति और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब देवों और असुरों के बीच समुद्र मंथन हो रहा था, तब मंदराचल पर्वत को समुद्र तल में टिकाए रखने के लिए भगवान विष्णु ने विशाल कछुए का रूप धारण किया था।
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष, वैशाख पूर्णिमा की शुरुआत 30 अप्रैल 2026 को रात 9 बजकर 12 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन अगले दिन रात 10 बजकर 52 मिनट पर होगा। ऐसे में इस साल कूर्म जयंती (Kurma Jayanti) 01 मई 2026 को मनाई जाएगी।
इस अवतार के लिए ज्यादातर ग्रंथों में ये भी माना जाता है कि कछुए से ही मनुष्य जीवन की शुरुआत हुई। यह अवतार बताता है कि सृष्टि की शुरुआत और जीवन का विकास जल से जुड़ा हुआ है। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इन चारों जीवन लक्ष्यों का संतुलन ही पूर्ण जीवन का आधार है।
विष्णु जी के कूर्म अवतार धैर्य, द्दढ़ता और स्थिरता का गहरा आध्यात्मिक संदेश देता है। जिस प्रकार एक कछूआ द्दढ़ता से अपना बोझ उठाता है उसी तरह भगवान विष्णु अपने इस रूप में यह दर्शता है कि सच्ची शक्ति स्थिरता और अटूट आस्था में निहित है।
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