Mohini Ekadashi सोमवार को मोहिनी एकादशी, जानिए पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त, मनोकामनाएं होंगी पूरी!

Mohini Ekadashi Ka Muhurat: सोमवार को पड़ रही मोहिनी एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन शुभ मुहूर्त में भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा और व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
Mohini Ekadashi Kab Ki Hai
मोहिनी एकादशी ( AI- डिजाइन फोटो)
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Mohini Ekadashi Kab Ki Hai : हिन्दू धर्म ग्रथों में एकादशी तिथि का विशेष महत्व महत्व बताया गया है। पूरे साल में कुल 24 एकादशी पड़ती है। जिसका अपना अलग-अलग महत्व है। ऐसे में इस बार वैशाख महीने में पड़ने वाली एकादशी यानि मोहिनी एकादशी का व्रत 27 अप्रैल 2026, दिन सोमवार को रखा जा रहा है।

मोहिनी एकादशी व्रत का आध्यात्मिक महत्व

हिंदू धर्म में मोहिनी एकादशी (Mohini Ekadashi) को अत्यंत पुण्यदायी और पापों का नाश करने वाली माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने का विधान है। मान्यता है कि श्री हरि की पूजा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि मोहिनी एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है...

मोहिनी एकादशी 2026 की तिथि:

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 26 अप्रैल 2026, शाम 6:06 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त: 27 अप्रैल 2026, शाम 6:15 बजे
  • व्रत रखने का दिन (उदया तिथि अनुसार): 27 अप्रैल 2026, सोमवार

क्यों 27 अप्रैल को व्रत रखा जाएगा?

हिंदू पंचांग में व्रत और त्योहार उदयातिथि (जिस दिन सूर्योदय के समय तिथि हो) के आधार पर मनाए जाते हैं। इसलिए 27 अप्रैल को सूर्योदय के समय एकादशी तिथि होने के कारण उसी दिन व्रत रखा जाएगा।

पूजा का शुभ मुहूर्त

मोहिनी एकादशी का शुभ मुहूर्त 27 अप्रैल को सुबह 9 बजकर 2 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। इस दौरान सभी भक्त भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा कर सकते हैं।

कब करें मोहिनी एकादशी का व्रत पारण?

मोहिनी एकादशी व्रत का पारण का शुभ समय 28 अप्रैल 2026 को सुबह 05 बजकर 43 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। इस दौरान सभी भक्त विधि विधान से अपना व्रत खोल सकते हैं।

मोहिनी एकादशी व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, भद्रावती नामक नगर में धनपाल नाम का एक धर्मात्मा वैश्य रहता था। उसके कई पुत्र थे, लेकिन सबसे छोटा पुत्र धृष्टबुद्धि अत्यंत दुराचारी और पाप कर्मों में लिप्त था। उसके बुरे आचरण से परेशान होकर पिता ने उसे घर से निकाल दिया।

घर से निकाले जाने के बाद वह इधर-उधर भटकता हुआ एक दिन कौण्डिन्य ऋषि के आश्रम पहुंचा। वहां उसने अपने पापों से मुक्ति पाने का उपाय पूछा। ऋषि ने उसे वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की मोहिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी।

धृष्टबुद्धि ने पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ इस व्रत का पालन किया। इस व्रत के प्रभाव से उसके सभी पाप नष्ट हो गए और अंततः उसे भगवान विष्णु के लोक में स्थान प्राप्त हुआ।

इस एकादशी का महत्व इसलिए भी विशेष माना जाता है क्योंकि इसी दिन भगवान विष्णु ने समुद्र मंथन के दौरान मोहिनी रूप धारण कर देवताओं को अमृत प्रदान किया और असुरों से उसकी रक्षा की।

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