कूर्म जयंती( सौ.सोशल मीडिया) 
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Kurma Jayanti: 1 मई को मनाई जाएगी कूर्म जयंती, जानिए इस पर्व का महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Kurma Jayanti Puja Vidhi: कूर्म जयंती भगवान विष्णु के कूर्म अवतार को समर्पित पावन पर्व है। इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने पर सुख-समृद्धि और जीवन में स्थिरता प्राप्त होने की मान्यता है।

सीमा कुमारी

Kurma Jayanti Shubh Muhurat: हिन्दू धर्म में वैशाख महीने की पूर्णिमा तिथि का बड़ा महत्व बताया गया है। क्योंकि, इस दिन बुद्ध पूर्णिमा के अलावा, कूर्म जयंती भी मनाई जाती है। जो कि इस बार कल 1 मई 2026 को मनाई जा रही है। धर्म ग्रथों में कूर्म जयंती भगवान विष्णु के प्रमुख अवतारों में से एक माना गया है।

कूर्म जयंती का आध्यात्मिक महत्व

सनातन धर्म में कूर्म जयंती का आध्यात्मिक एवं धार्मिक महत्व बताया गया है। माना जाता है कि इस दिन विष्णु जी के इस अवतार की पूरे विधि-विधान से पूजा करने जीवन में आने वाली हर परेशानी दूर होती है और मन की हर मनोकामना पूरी होती है। साथ ही मन शांत होता है और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

कूर्म जयंती के शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, इस वर्ष, वैशाख पूर्णिमा की शुरुआत 30 अप्रैल 2026 को रात 9 बजकर 12 मिनट पर होगी और इसका समापन अगले दिन रात 10 बजकर 52 मिनट पर होगा। ऐसे में इस साल कूर्म जयंती 01 मई 2026 को मनाई जाएगी।

कैसे करें कूर्म जयंती की पूजा

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें।
  • उसके बाद घर के मंदिर को अच्छे से साफ करें और गंगाजल का छिड़काव करें।
  • फिर एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर विष्णु जी की तस्वीर स्थापित करें।
  • सबसे पहले भगवान कूर्म को तिलक लगाएं और फिर दीपक जलाएं।
  • इसके बाद विष्णु जी को अबीर, गुलाल, फूल, चावल, आदि चीजें एक-एक करके अर्पित करें।
  • फिर विष्णु जी के मंत्रों और नामों का जाप करें और पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं।
  • अंत में विष्णु जी की आरती करें और पूजा में हुई सभी गलती के लिए माफी मांगे।

कछुए से हुई मानव जीवन की शुरुआत

इस अवतार के लिए ज्यादातर ग्रंथों में ये भी माना जाता है कि कछुए से ही मनुष्य जीवन की शुरुआत हुई। यह अवतार बताता है कि सृष्टि की शुरुआत और जीवन का विकास जल से जुड़ा हुआ है। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इन चारों जीवन लक्ष्यों का संतुलन ही पूर्ण जीवन का आधार है।

कूर्म अवतार में छिपा है गूढ़ रहस्य

विष्णु जी के कूर्म अवतार धैर्य, द्दढ़ता और स्थिरता का गहरा आध्यात्मिक संदेश देता है। जिस प्रकार एक कछूआ द्दढ़ता से अपना बोझ उठाता है उसी तरह भगवान विष्णु अपने इस रूप में यह दर्शता है कि सच्ची शक्ति स्थिरता और अटूट आस्था में निहित है।

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