रक्षाबंघन का शुभ मुहूर्त (सौ.सोशल मीडिया ) 
धर्म

रक्षाबंधन के दिन 'भद्रा काल' और 'पंचक' का भी साया, जान लीजिए राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

रक्षाबंधन’ का त्यौहार 19 अगस्त को मनाया जाने वाला है जिस पर भद्रा का साया मंडरा रहा है वहीं इसी दिन से पंचक भी लगने जा रहा है। ऐसे में आइए जानें राखी बांधने के लिए सबसे उत्तम शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।

दीपिका पाल

भाई-बहन के अटूट रिश्ते और प्यार को समर्पित ‘रक्षा बंधन’ (Raksha Bandhan 2024) जल्द आने वाला है। इस बार ‘रक्षाबंधन’ का त्यौहार 19 अगस्त को मनाया जाने वाला है। इसके अलावा, आपको जानकारी के लिए, इस साल रक्षाबंधन पर जहां भद्रा का साया मंडरा रहा है वहीं इसी दिन से पंचक भी लगने जा रहा है। ऐसे में आइए जानें राखी बांधने के लिए सबसे उत्तम शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।

रक्षाबंधन के दिन बन रहे ये 4 शुभ संयोग

रक्षा बंधन के पर्व पर इस बार चार शुभ योग बन रहे हैं। ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, 90 वर्ष के बाद राखी बांधना काफी शुभ है। वैदिक पंचांग में बताया गया है कि राखी के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग, शोभन योग और श्रवण नक्षत्र का महासंयोग बन रहा है। इसलिए इस बार का यह त्योहार काफी शुभ माना जा रहा है।

भद्रा काल में न बांधें राखी

ज्योतिषाचार्य के अनुसार, भद्रा काल में राखी बांधना अशुभ माना गया है। इसलिए बहन 1 बजे के बाद अपने भाई की कलाई पर राखी बांधे। ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, 18 अगस्त को रात में में भद्रा काल प्रवेश कर रहा है। बहन 19 तारीख को 1 बजे के बाद से रात के 8 बजे तक राखी बांध सकती हैं। कच्ची राखी बांधेगी तो ज्यादा ठीक रहेगा, ये शुद्ध होती है। धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक, रक्षाबंधन का पर्व भद्रा काल में नहीं मनाना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि भद्रा काल के दौरान राखी बांधना शुभ नहीं होता है। पौराणिक कथा के अनुसार, लंकापति रावण को उसकी बहन ने भद्रा काल में राखी बांधी थी और उसी साल प्रभु राम के हाथों रावण का वध हुआ था। इस कारण से भद्रा काल में कभी भी राखी नहीं बांधी जाती है।

कब से होगा पंचक का साया

ज्योतिष गुरु के अनुसार, रक्षाबंधन के दिन से ही पंचक भी शुरू हो रहा है। पंचांग के मुताबिक, 19 अगस्त 2024, सोमवार को शाम 7 बजकर 1 मिनट से पंचक शुरू हो रहा है। पंचक समाप्त 23 अगस्त को होगा। ऐसे में रक्षाबंधन के दिन शुभ मुहूर्त देखकर ही अपने भाई की कलाई पर राखी बांधना उत्तम रहेगा। 19 अगस्त को सुबह श्रवण नक्षत्र के बाद धनिष्ठा नक्षत्र लग जाएगा। ऐसे में यह राज पंचक होंगे।

रक्षाबंधन का क्या है महत्व

पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि सबसे पहले द्रौपदी ने श्री कृष्ण को राखी बांधी थी। ये मान्यता है कि भगवान श्री कृष्ण की उंगली सुदर्शन चक्र से कट गई थी, खून बंद करने के लिए द्रौपदी ने अपनी साड़ी से एक टुकड़ा फाड़कर कटे हुए जगह पर बांधा था। उसी वक्त भगवान कृष्ण ने हमेशा द्रौपदी की रक्षा करने का वचन दिया था। जब द्रौपदी को सार्वजनिक तौर पर अपमानित किया जा रहा था, तब श्री कृष्ण ने अपना वचन निभाया था।

लेखिका- सीमा कुमारी

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