छठ का प्रसाद मांग कर ही क्यों खाते हैं 
धर्म

छठ का प्रसाद मांग कर ही क्यों खाते हैं, जानिए इसकी विशेष महिमा

लोक आस्था का महापर्व छठ महापर्व आज यानी 5 नवंबर नहाय खाय से शुरु हो रही है। चार दिनों तक चलने वाले पर्व छठ उत्तर भारत का सबसे लोकप्रिय त्योहार है। इस त्योहार में कद्दू भात, खरना रसियाव रोटी और ठेकुआ ये तीन तरह के प्रसाद पूजा के लिए बनाए जाते हैं। इस पर्व में लोग छठ पूजा के प्रसाद को मांग कर खाते हैं।

सीमा कुमारी

Chhath Puja 2024 : लोक आस्था का महापर्व छठ महापर्व आज यानी 5 नवंबर नहाय खाय से शुरु हो रही है। चार दिनों तक चलने वाले पर्व छठ उत्तर भारत का सबसे लोकप्रिय त्योहार है। यह खासतौर पर बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है। इसमें महिलाएं सूर्य देव और छठी मैया की पूजा-अर्चना करती हैं और 36 घंटे तक निर्जला व्रत रखती हैं। इसे सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है।

इस त्योहार में कद्दू भात, खरना रसियाव रोटी और ठेकुआ ये तीन तरह के प्रसाद पूजा के लिए बनाए जाते हैं। इस पर्व में लोग छठ पूजा के प्रसाद को मांग कर खाते हैं। बहुत से लोगों को इसके बारे में नहीं पता है इसलिए आइए जानते हैं कि इस महापर्व में लोग एक दूसरे से क्यों प्रसाद मांग कर खाते हैं।

जानिए क्यों मांग कर खाया जाता है छठ का प्रसाद

पौराणिक मान्यताओं की मानें तो, छठ पूजा के त्योहार में प्राकृतिक पकवान और मिठाई का बहुत महत्व बताया गया है। इस छठ पूजा में प्रसाद के रूप में सब्जी, फल और फूलों का बहुत महत्व है।

छठ पूजा के प्रसाद को एक दूसरे से मांग कर खाने को लेकर यह मान्यता है कि छठ का प्रसाद मांग कर खाने से भगवान सूर्य देव और छठी मैया के प्रति भक्तों की आस्था प्रकट होती है।

कहा जाता है कि, छठ पूजा का प्रसाद मांग कर खाने से छठी मैया और सूर्य देव का मान सम्मान बढ़ता है। प्रसाद मांग कर खाने से शरीर के दुर्गुण दूर होते हैं और छठी मैया भक्तों से प्रसन्न होती है और कृपा करती हैं।

लोक मान्यता है कि छठ पूजा के प्रसाद को मांगने में संकोच नहीं करना चाहिए और नहीं कोई प्रसाद बांट रहा हो तो उसे मना करना चाहिए।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, छठ पूजा का प्रसाद मिट्टी के नए चूल्हे पर बनाया जाता है। इस पूजा में शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है। मिट्टी के चूल्हे को शुद्ध और पवित्र माना जाता है।

मिट्टी न होने पर ईंट के चूल्हे का भी उपयोग किया जाता है। मिट्टी के चूल्हे में घीया यानी कद्दू भात, रसिआव रोटी और ठेकुआ आदि बनाया जाता है। चूल्हा जलाने के लिए आम के लकड़ी का उपयोग किया जाता है।

छठ पूजा के प्रसाद के साथ गलती से भी न करें ऐसी गलती

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पूजा के प्रसाद को मांग कर खाने से छठी मैया और सूर्य देव की कृपा बनी रहती है। लेकिन, यदि कोई छठ पूजा के प्रसाद को लेने से मना करते हैं या लेकर कहीं रख देते हैं तो छठी मैया नाराज हो जाती है।

बहुत से लोग कई बार अनजाने में छठी मैया के प्रसाद को ले लेते हैं और तुरंत खाने के बजाए कहीं भी रखकर भूल जाते हैं, ऐसा बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। प्रसाद को लेने के बाद नहीं खाने और न लेने से प्रसाद और छठी मैया का अपमान होता है। छठी मैया प्रसाद के अपमान से नाराज हो सकती है। इसलिए ऐसी गलती भूलकर भी न करें।

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