कन्या पूजन फोटो.सोशल मीडिया
धर्म

Kanya Pujan: हलवा-पूरी और काले चने का भोग क्यों? कन्या पूजन में लंगूरा क्यों बैठाते हैं?

Kanya Pujan Significance: कन्या पूजन में हलवा-पूरी और काले चने का प्रसाद ही क्यों बनाया जाता है? नौ कन्याओं के साथ एक बालक को बैठाने की धार्मिक मान्यता के बारे में भी जानें।

रीता राय सागर

Highlights:

  • कन्या पूजन में हलवा, पूरी और काले चने का प्रसाद उत्तर भारत के कई घरों में पारंपरिक रूप से बनाया जाता है।

  • नौ कन्याओं को मां दुर्गा के नौ स्वरूपों का प्रतीक मानकर पूजा जाता है।

  • साथ बैठाए जाने वाले बालक को कई परिवारों में भैरव या लंगूरा कहा जाता है।

Kanya Pujan Me Halwa Puri Chana Ka Prasad: नवरात्रि में अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन किया जाता है। इस दिन छोटी कन्याओं को मां दुर्गा के नौ स्वरूपों का प्रतीक मानकर उनकी पूजा की जाती है और उन्हें हलवा, पूरी व काले चने का प्रसाद भोग लगाया जाता है।

कई घरों में कन्याओं के साथ एक छोटे बालक को भी भोजन कराया जाता है, जिसे लंगूरा या भैरव का प्रतीक कहा जाता है। लेकिन सवाल यह है कि कन्या पूजन में यही तीन चीजें क्यों बनाई जाती हैं और नौ कन्याओं के साथ एक बालक को बैठाने के पीछे क्या परंपरा है?

कन्या पूजन में हलवा-पूरी और काले चने का भोग क्यों?

नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा के बाद कन्याओं को भोजन कराई जाती है। उत्तर भारत के ज्यादातर घरों में इस अवसर पर सूजी का हलवा, पूरी और सूखे काले चने बनाए जाते हैं। यह भोजन कन्याओं को प्रसाद के रूप में परोसा जाता है।

हलवा: मिठास और प्रसन्नता का प्रतीक

कन्या पूजन में सूजी का हलवा खास तौर पर बनाया जाता है। इसे घी, सूजी और चीनी से तैयार किया जाता है। इसका मीठा स्वाद इस अवसर को खास बनाता है। हर परंपरा में मिठाई को खुशी, प्रेम और शुभ अवसर से जोड़कर देखा जाता है। कन्याओं को हलवा खिलाने का भाव उनके प्रति स्नेह और सम्मान जताना है।

पूरी: पारंपरिक भोजन का हिस्सा

हलवे के साथ पूरी बनाने की परंपरा भी कई घरों में लंबे समय से चली आ रही है। गेहूं के आटे से तैयार पूरी त्योहारों और धार्मिक आयोजनों में परोसे जाने वाले पारंपरिक पकवानों में शामिल है। कोई भी शुभ मौका हो, पूरी के बिना अधूरी सी लगती है।  

काले चने: भोग की पारंपरिक पहचान

काले चने कन्या पूजन की थाली का एक खास हिस्सा हैं। इन्हें आमतौर पर मसालों के साथ बिना प्याज-लहसुन के तैयार किया जाता है। उत्तर भारत में हलवा-पूरी के साथ काले चने परोसने की परंपरा काफी प्रचलित है। इस खास भोजन को कन्या पूजन के प्रसाद के रूप में पहचाना जाता है।

कन्या पूजन में 9 कन्याओं को ही क्यों बैठाया जाता है?

नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को समर्पित होते हैं। इन्हें नवदुर्गा कहा जाता है। कन्या पूजन में नौ छोटी कन्याओं को देवी के नौ रूपों का प्रतीक मानकर आमंत्रित किया जाता है। उनकी पूजा की जाती है, तिलक लगाया जाता है और भोजन कराकर उपहार या दक्षिणा दी जाती है।

नौ कन्याओं के साथ एक बालक को क्यों बैठाते हैं?

कन्या पूजन में नौ कन्याओं के साथ एक छोटे बालक को बैठाने का रिवाज है। इसे अलग-अलग क्षेत्रों में लंगूरा, लांगुरिया या बटुक कहा जाता है। कई जगह उसे भगवान भैरव का प्रतीक माना जाता है, जिन्हें देवी का रक्षक बताया जाता है।

मान्यता के अनुसार, देवी की पूजा के साथ भैरव की आराधना भी की जाती है। उसे भी तिलक लगाया जाता है और कन्याओं की तरह आदर-सम्मान दिया जाता है। भैरव को देवी का रक्षक कहा जाता है।

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