Kajari Teej Kab Hai: पति की आयु लंबी और दांपत्य जीवन की खुशहाली के लिए कई व्रत रखे जाते है। इन्ही में से एक है कजरी तीज व्रत। जो हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर मनाई जाती है। कजरी तीज को सातुड़ी तीज और कजली तीज के नाम से भी लोग जानते है। इस साल कजरी तीज व्रत कब रखा जाएगा, पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजा की सही विधि क्या है? आइए इस बारे में विस्तार से जानें-
भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि 31 अगस्त 2026, सोमवार को रहेगी।
तृतीया तिथि प्रारंभ: 30 अगस्त 2026, रविवार, सुबह करीब 9 बजकर 36 मिनट पर।
तृतीया तिथि समाप्त: 31 अगस्त 2026, सोमवार, सुबह करीब 8 बजकर 50 मिनट पर।
अमृत चौघड़िया- सुबह 5 बजकर 58 मिनट से 7 बजकर 34 मिनट तक।
शुभ चौघड़िया- सुबह 9 बजकर 10 मिनट से 10 बजकर 45 मिनट तक।
लाभ चौघड़िया- दोपहर 3 बजकर 32 मिनट से शाम 5 बजकर 8 मिनट तक।
अमृत चौघड़िया- शाम 5 बजकर 8 मिनट से 6 बजकर 44 मिनट तक।
कजरी तीज पर सुबह स्नान आदि करके निवृत्त हो जाएं और साफ वस्त्र पहनें।
मां पार्वती और महादेव का ध्यान कर मन ही मन व्रत का संकल्प करें।
अब पूजा स्थल की सफाई करें और गंगाजल छिड़कें।
इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा को चौकी पर स्थापित करें।
अब पूजा शुरू करें. सबसे पहले दीपक और धूप जलाएं।
रोली, अक्षत, हल्दी और सुहाग सामग्री अर्पित करें।
सुहाग से जुड़ी सामग्री में हरी चुड़ियां और आलता जरूर रखें।
अब मन को शांत करें और शिव जी को बेलपत्र चढ़ाएं।
शिव जी को जल व दूध भी अर्पित करें।
मौसम अनुसार फल, खीर, मिठाई आदि का भोग चढ़ाएं ।
इसके बाद कजरी तीज की कथा सुनें सुनाएं ।
अब शिव-पार्वती की आरती गाकर पूजा को संपन्न करें।
मन में सुखी दांपत्य जीवन की कामना करते हुए भूल-चूक के लिए क्षमा मांगे ।
शिव-पार्वती पूजा करें
भगवान शिव को दूध, दही, शहद व बेलपत्र अर्पित करें तथा माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की सामग्री चढ़ाएं।
नीमड़ी माता व नीम पूजन करें
दीवार पर मिट्टी-गोबर से तालाब जैसी आकृति बना, नीम की टहनी रोपकर नीमड़ी माता की विधि-विधान से पूजा करें।
रात्रि में चंद्रमा को जल या दूध का अर्घ्य देकर सत्तू या सात्विक भोजन से अपना व्रत पूरा करें।
सुहागिनें मिलकर पारंपरिक कजरी लोकगीत गाएं और सुहाग के उल्लास में झूले का आनंद लें।