1 नवंबर 2026, रविवार को भानु सप्तमी, अहोई अष्टमी और राधाकुंड स्नान का संयोग है।
रविवार को सप्तमी तिथि पड़ने के कारण इस दिन भानु सप्तमी मनाई जा रही है।
भानु सप्तमी पर सूर्य देव की पूजा, जल अर्पित करने और मंत्र जाप का विशेष धार्मिक महत्व है।
श्रद्धालु सुबह स्नान करके सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
पूजा में स्नान, अर्घ्य और सूर्य मंत्रों के जाप की सरल विधि अपनाई जाती है।
Bhanu Saptami Puja Vidhi : आज 1 नवंबर 2026, को भानु सप्तमी ,अहोई अष्टमी, राधाकुंड स्नान और रविवार व्रत रखा जा रहा है। अगर बात भानु सप्तमी की बात करें तो हिंदू धर्म में सूर्य देव को प्रत्यक्ष देवता माना जाता है। उनकी उपासना का विशेष महत्व है। जब सप्तमी तिथि रविवार के दिन पड़ती है, तो इसे भानु सप्तमी कहा जाता है।
यह दिन सूर्य देव की आराधना, अर्घ्य देने और मंत्र जाप के लिए विशेष माना जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालु सुबह स्नान करके सूर्य देव की पूजा करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। अगर आप भी भानु सप्तमी पर पूजा करना चाहते हैं, तो जानिए स्नान से लेकर अर्घ्य और मंत्र जाप तक की सरल विधि।
भानु सप्तमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने की परंपरा है। स्नान के बाद साफ और स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके सूर्य देव का स्मरण करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन स्नान और सूर्य उपासना को विशेष पुण्यदायी माना जाता है। आप अपनी सुविधा के अनुसार घर पर स्नान करके भी पूजा कर सकते हैं।
स्नान के बाद तांबे के लोटे में साफ जल भरें। इसमें लाल फूल या अक्षत डाल सकते हैं। अब सूर्य देव की ओर मुख करके दोनों हाथों से धीरे-धीरे जल अर्पित करें। इस दौरान मन में श्रद्धा और सकारात्मक विचार रखें। ध्यान रखें कि जल अर्पित करते समय सूर्य की ओर सीधे न देखें। अर्घ्य के बाद हाथ जोड़कर सूर्य देव को प्रणाम करें।
सूर्य देव की पूजा के दौरान उनके सरल मंत्र का जाप किया जा सकता है। श्रद्धालु 'ॐ सूर्याय नमः' या 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' मंत्र का जाप करते हैं। आप अपनी श्रद्धा के अनुसार 11, 21 या 108 बार मंत्र बोल सकते हैं। इसके अलावा आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना भी धार्मिक परंपरा का हिस्सा है।
इस दिन अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य करें। जरूरतमंदों को भोजन, अनाज या वस्त्र देना अच्छी परंपरा मानी जाती है। पूजा के दौरान स्वच्छता और सात्विकता का ध्यान रखें। याद रखें कि पूजा का मुख्य आधार श्रद्धा, अच्छे विचार और दूसरों के प्रति सद्भाव है।