हरितालिका तीज फोटो.एआई
धर्म

Hartalika Teej Vrat Paran: निर्जला व्रत के बाद कब और कैसे खोलें तीज का व्रत? जानें सही विधि और जरूरी नियम

Hartalika Teej Vrat: हरतालिका तीज का निर्जला व्रत रखने के बाद दूसरे दिन पारण किया जाता है। आइए जानते हैं व्रत खोलने का सही समय, पूजा विधि और पारण से जुड़े जरूरी नियम।

रीता राय सागर

Haritalika Teej: हरितालिका तीज का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार महिलाएं पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए तीज का व्रत रखती हैं। वहीं अविवाहित युवतियां मनचाहे जीवनसाथी की कामना से हरितालिका तीज का व्रत करती हैं।

पूरे दिन निर्जला रखे जाने वाले व्रत के कारण इसे बेहद कठिन व्रत माना जाता है। व्रत के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है और रात में जागरण भी किया जाता है। ऐसे में व्रत रखने के साथ ही यह जानना भी जरूरी है कि अगले दिन इसका पारण किस प्रकार किया जाए।

हरतालिका तीज का व्रत कब खोलना चाहिए?

सनातन परंपरा में जितनी महत्व उपवास और व्रत का है, उतना ही महत्व पारण का भी होता है। हरतालिका तीज का व्रत अगले दिन सूर्योदय के बाद पूजा संपन्न करने के बाद खोला जाता है। व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह स्नान करके भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करती हैं।

पूजा पूरी होने के बाद व्रत का संकल्प समाप्त किया जाता है और इसके बाद पारण किया जाता है। अलग-अलग स्थानों और पंचांग के अनुसार पूजा और पारण का समय अलग हो सकता है, इसलिए अपने क्षेत्र के पंचांग के अनुसार समय देखना उचित माना जाता है।

पारण का समय: 15 अगस्त की शाम 05:28 बजे के बाद या 16 अगस्त को सूर्योदय के बाद।

व्रत खोलने से पहले क्या करें?

हरतालिका तीज के व्रत का पारण करने से पहले कुछ धार्मिक परंपराओं का पालन किया जाता है। सबसे पहले सुबह स्नान करके साफ वस्त्र पहनें। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें। भगवान शिव को बेलपत्र और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। माता पार्वती को श्रृंगार की सामग्री चढ़ाकर उनका आशीर्वाद लें।

पूजा के बाद आरती करें। सुहागिन महिलाएं माता पार्वती को चढ़ाया गया सिंदूर अपने माथे पर लगा सकती हैं। इसके बाद अपनी सास या ननद, यदि वे सुहागिन हों, को सुहाग की सामग्री भेंट करने की परंपरा भी बताई गई है।

हरतालिका तीज पारण की विधि क्या है?

धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजा पूरी होने के बाद व्रत का पारण किया जाता है। पूजा में चढ़ाए गए प्रसाद या भोग से व्रत खोली जाती है। इसके बाद पानी ग्रहण किया जाता है और फिर हल्का, सात्विक भोजन किया जाता है। लंबे समय तक निर्जला व्रत रखने के बाद अचानक बहुत अधिक या भारी भोजन करने से बचना चाहिए।

व्रत खोलते समय किन बातों का ध्यान रखें?

हरतालिका तीज का व्रत खोलते समय भोजन को लेकर भी कुछ धार्मिक मान्यताएं हैं।

  • सबसे पहले पूजा में चढ़ाया गया प्रसाद ग्रहण करने की परंपरा है।

  • इसके बाद पानी पी जाती है।

  • भोजन सात्विक रखने की सलाह दी जाती है।

  • व्रत खोलते समय बहुत अधिक तला-भुना या भारी भोजन करने से बचें।

  • धार्मिक मान्यता के अनुसार प्याज और लहसुन से युक्त भोजन से बचा जाता है।

  • निर्जला व्रत के बाद शरीर को पर्याप्त तरल पदार्थ देना जरूरी है।

हरतालिका तीज व्रत में क्यों महत्वपूर्ण है पारण?

हरतालिका तीज का व्रत भगवान शिव और माता पार्वती के प्रति श्रद्धा और दांपत्य सुख की कामना से जुड़ा हुआ है। इसलिए व्रत की तरह ही इसके पारण को भी धार्मिक विधि के अनुसार करने की परंपरा है।

हालांकि, व्रत और पारण से जुड़े नियम अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा और पारण का समय तय करना बेहतर माना जाता है।

तरुण तेजपाल केस: 13 साल की कानूनी जंग और बचपन का वो खौफनाक सच, पीड़िता ने पहली बार बयां किया अपना दर्द

मेरा शरीर अस्पताल में, आत्मा छात्रों के बीच… JPSC-JSSC आंदोलन के बीच देवेंद्र महतो की भावुक अपील

दिल्ली बम धमाके के पीछे अल-कायदा का हाथ, UNSC ने पेश की रिपोर्ट, कहा- बढ़ रहा है खतरा

आज की ताजा खबर 13 अगस्त LIVE: संसद का मानसून सत्र आज होगा खत्म, छात्र आंदोलन पर हो सकती है चर्चा

बेंगलुरु में FDA सख्त: स्वास्थ्य विभाग की कैंटीन में एक्सपायर्ड खाना, विधानसभा परिसर में रेंगते मिले कॉकरोच!