हरियाली तीज  (सौ.जैमिनी)
धर्म

Teej 2026: इस बार सोमवार को हरतालिका तीज, सिर्फ 61 मिनट का है सुबह का पूजा मुहूर्त जानें सही समय और नियम

Hartalika Teej : हरतालिका तीज 2026 इस बार सोमवार को पड़ रही है। सुबह पूजा का शुभ मुहूर्त केवल 61 मिनट का रहेगा। जानें हरतालिका तीज की सही तारीख, पूजा का शुभ समय और व्रत से जुड़े जरूरी नियम।

सीमा कुमारी

Hartalika Teej Date 2026: हरियाली तीज के बाद महिलाओं को अब हरतालिका तीज के पर्व का बेसब्री से इंतजार है, जो कि हर साल भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। अखंड सौभाग्य और मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए रखा जाने वाला तीज का व्रत 14 सितंबर, सोमवार को मनाया जाएगा।

ज्योतिषयों के अनुसार, इस वर्ष 2026 यह व्रत सोमवार के दिन पड़ रहा है, जिसे भगवान शिव का ही दिन माना जाता है; इसलिए इस बार के व्रत का महत्व और भी अधिक बढ़ गया है। चलिए अब जानें हरतालिका तीज 2026 में कब है और इस पर्व से जुड़ी अन्य जरूरी बातों के बारे में।

हरतालिका तीज कब मनाई जाएगी?

पंचांग के अनुसार, इस वर्ष 2026 भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर को सुबह 7:08 बजे शुरू होगी और 14 सितंबर 2026 को सुबह 7:06 बजे समाप्त होगी। ऐसे में उदया तिथि के आधार पर हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर 2026 को रखा जाएगा।

पूजन के लिए शुभ समय

ज्योतिष पंचांग के अनुसार, इस वर्ष 2026 पूजन के लिए शुभ समय 14 सितंबर 2026 यानी हरतालिका तीज के दिन सुबह 6 बजकर 5 मिनट पर सूर्योदय होगा, जिसके बाद सुबह 4 बजकर 32 मिनट से सुबह 5 बजकर 19 मिनट तक ब्रह्म मुहूर्त रहने वाला है।

इसके अलावा, सुबह 11: 52 मिनट से दोपहर 12: 41 मिनट तक अभिजित मुहूर्त रहेगा, जबकि प्रातः काल में हरितालिका तीज की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 06:05 से सुबह 07:06 मिनट तक होगा।

हरतालिका तीज पूजा के लिए क्या है प्रदोष काल समय

धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि, जो महिलाएं सुबह पूजा नहीं कर पाती हैं, वो शाम को पूजा कर सकती हैं, उनके लिए प्रदोष काल (सूर्यास्त के ठीक बाद का समय) सबसे उत्तम माना जाता है।

प्रदोष काल का समय

सूर्यास्त के बाद के लगभग 2 घंटे 24 मिनट की अवधि प्रदोष काल कहलाती है। सोमवार की शाम को भगवान शिव और माता पार्वती की बालू (रेत) से मूर्ति बनाकर पूजा करने का यह सबसे पवित्र समय होगा।

हरतालिका तीज व्रत से जुड़े नियम क्या है?

सनातन धर्मं में हरतालिका तीज व्रत को अत्यंत कठिन माना जाता है, इसलिए इसके नियमों का पालन पूरी निष्ठा एवं सावधानी से किया जाता है जो इस प्रकार है-

निराहार और निर्जला

हरतालिका तीज व्रत पूरी तरह से निराहार और निर्जला रखा जाता है। अगले दिन पारण (व्रत खोलने) के बाद ही जल और अन्न ग्रहण किया जाता है।

सोलह श्रृंगार करने की परम्परा

इस दिन सुहागिन महिलाएं नए वस्त्र पहनकर पूर्ण सोलह श्रृंगार करती हैं और माता पार्वती को भी सुहाग की सामग्री अर्पित करती हैं।

रात्रि जागरण एवं भजन-कीर्तन

इस व्रत में रात के समय सोना वर्जित माना गया है। महिलाएं पूरी रात जागकर भगवान शिव और माता पार्वती के भजनों का कीर्तन और आरती करती हैं।

व्रत कथा बिना व्रत का फल अधूरा

पूजा के दौरान हरतालिका तीज की व्रत कथा सुनना या पढ़ना अनिवार्य माना जाता है, इसके बिना व्रत का फल अधूरा रहता है।

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