Guru Purnima Puja Vidhi :पूरे देशभर में आज गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। यह दिन गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी तिथि पर महर्षि वेदव्यास का अवतरण हुआ था।
उन्होंने चारों वेदों का विभाजन, महाभारत की रचना तथा 18 पुराणों का संकलन कर मानव समाज को ज्ञान का अमूल्य भंडार प्रदान किया। इसलिए उन्हें आदिगुरु माना जाता है और इस दिन व्यास पूजा भी की जाती है।
गुरु पूर्णिमा पर कैसे करें पूजा ?
- धार्मिक एवं लोक मान्यता के अनुसार,गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरु की पूजा करने के लिए प्रात:काल जल्दी उठें और यदि संभव हो तो किसी जल तीर्थ जैसे गंगा नदी आदि पर जाकर स्नान करें।
- तन और मन से पवित्र होने के यदि संभव हो तो अपने गुरु स्थान पर जाकर या फिर अपने घर में पूरे विधि-विधान से अपने गुरु के चित्र या मूर्ति आदि की पूजा करनी चाहिए।
- यदि आप अपने घर में गुरु की पूजा कर रहे हैं तो इसके लिए ईशान कोण को साफ करके वहां पर एक चौकी पर आसन बिछाकर उनकी प्रतिमा, चित्र या फिर चरण पादुका रखें और उस पर पवित्र जल छिड़कें।
- यदि आपके गुरु साक्षात मौजूद हों तो उन्हें उचित आसन देकर उनके सबसे पहले पैर पखारें और उसे साफ कपड़े से पोंछें।
- यदि आप के गुरु उपलब्ध हों, या फिर उनका चित्र भी न उपलब्ध हो तो आप पादुका पूजन के जरिए अपनी श्रद्धा प्रकट करें।
- गुरु की मूर्ति, चरण पादुका या फिर उनके पैर को शुद्ध जल से पवित्र करने के बाद उन्हें रोली, चंदन, अक्षत आदि से तिलक लगाकर ताजे फूल की माला पहनाएं।
- इसके बाद अपने गुरु के लिए फल, मिष्ठान आदि का भोग अर्पित करके गुरु मंत्र का पाठ या फिर 'ॐ गुरुवे नमः' मंत्र का कम से कम एक माला जप करें।
- पूजा के अंत में शुद्ध देशी घी से बने दीये से आरती उतारें। इसके बाद गुरु पूजा में हुई भूल-चूक के लिए क्षमा प्रार्थना करते हुए अपने लिए आशीर्वाद की कामना करें।
गुरु पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
महर्षि वेदव्यास का जन्म
इस दिन को 'व्यास पूर्णिमा' भी कहते हैं क्योंकि वेदों का विभाजन और महाभारत जैसे ग्रंथ लिखने वाले महर्षि वेदव्यास का जन्म इसी दिन हुआ था।
अज्ञान अंधकार से मुक्ति
'गुरु' शब्द का अर्थ है जो अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाए।
प्रथम आदिगुरु शिव
योग परंपरा के अनुसार, इसी दिन आदिदेव भगवान शिव ने सप्तऋषियों को योग का पहला ज्ञान दिया था और वे प्रथम आदिगुरु बने थे।