गुड़ी पड़वा (सौ. AI) 
धर्म

गुड़ी पड़वा के दिन ये गलतियां पड़ेगी बहुत भारी! पढ़िए और गांठ बांध लें

Gudi Padwa: गुड़ी पड़वा के दिन कुछ छोटी-छोटी गलतियां आपकी पूजा और शुभ फल पर असर डाल सकती हैं। जानिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है और किन गलतियों से बचना चाहिए, ताकि सालभर सुख-समृद्धि बनी रहे।

सीमा कुमारी

Gudi Padwa Mistake: 19 मार्च को पूरे देशभर में गुड़ी पड़वा का पावन पर्व हर्षोल्लास एवं धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। खासतौर पर महाराष्ट्र में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता हैं।

यह पर्व हर साल चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है और गुड़ी पड़वा के साथ ही नव वर्ष की शुरुआत मानी जाती है, वहीं इस दिन से ही चैत्र नवरात्रि की भी शुरुआत हो जाती है।

जिसके कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। गुड़ी पड़वा के मौके पर त्योहार मनाते हुए महाराष्ट्रीयन महिलाएं घरों में गुड़ी फहराती है।

हिंदू धर्म शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस दिन क्या नहीं करना चाहिए?

गुड़ी पड़वा के दिन कौन सी गलतियां नहीं करना चाहिए?

  • नशा न करें

हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार, गुड़ी पड़वा का दिन बहुत ही शुभ एवं पवित्र दिन होता है। कहा जाता है कि, इस दिन भूलकर भी किसी भी प्रकार का नशा करने से बचना चाहिए।

  • नॉन वेज का सेवन न करें

कहा जाता है कि, इस दिन प्याज, लहसुन और नॉन वेज खाने से बचना चाहिए। क्योंकि, इस दिन मीठा और पारंपरिक भोजन खाने की परंपरा है।

  • बाल, नाखून न काटें

गुड़ी पड़वा के दिन नाखून नहीं काटने चाहिए और न ही दाढ़ी-मूंछ और बाल नहीं कटवाने चाहिए।

  • घर को गंदा न रखें

इस दिन घर को गंदा नहीं रखते हैं और गंदे और बिना धुले कपड़े नहीं पहनने चाहिए।

  • अपशब्द न कहे

यह हिन्दू धर्म का नव वर्ष का पहला दिन होता है इसलिए इस दिन अपशब्द का प्रयोग नहीं करें। अर्थात किसी को गाली देना, किसी का अपमान करना, कटू वचन कहना आदि कार्य नहीं करें।

  • ब्रह्मचर्य का पालन करें

इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।

क्या है गुड़ी पड़वा का महत्व

गुड़ी पड़वा हिंदू नववर्ष का शुभारंभ माना जाता है, जिसका विशेष धार्मिक महत्व है। ‘गुड़ी’ का अर्थ ध्वज या विजय पताका होता है, जबकि ‘पड़वा’ मराठी भाषा में प्रतिपदा तिथि को कहा जाता है।

यही कारण है कि इस पर्व को गुड़ी पड़वा के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने जगत की रचना की थी। इसलिए यह तिथि नई शुरुआत, उत्साह और शुभ कार्यों के लिए अत्यंत पवित्र मानी जाती है।

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