गायत्री जयंती (फोटो.सोशल मीडिया)  
धर्म

Gayatri Jayanti: वेदों की जननी मां गायत्री की जयंती आज, जानें 24 अक्षरों में छुपी 24 शक्तियों के बारे में

Gayatri Jayanti 2026: वेदमाता गायत्री का अवतरण ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी को होता है। इस दिन गायत्री मंत्र के जप का विशेष महत्व है। मान्यता है कि चारों वेद, शास्त्र और श्रुतियां गायत्री से ही निकली हैं।

रीता राय सागर

Gayatri Jayanti Importance: वेदों की माता को गायत्री कहा जाता है, इनका प्रकाट्य ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को हुआ था। इस वजह से हर साल इस तिथि को गायत्री जयंती मनाते हैं। इस वजह से यह दिन और भी पुण्य फलदायी होता है।

ब्रह्मा, विष्णु और महेश भी गायत्री माता की पूजा करते हैं। कहा जाता है कि गायत्री माता से ही 4 वेदों की उत्पत्ति हुई है। गायत्री मंत्र में 4 वेदों का सार है। ब्रह्मा जी ने गायत्री मंत्र के 24 अक्षरों की रचना चार वेदों की रचना से पहले की थी। इस मंत्र के हर शब्द में गुप्त शक्तियां छिपी है।

मां गायत्री का प्राकट्य कैसे हुआ

मान्यता है कि ब्रह्मा जी पर गायत्री मंत्र प्रकट हुआ था और उन्होंने इसकी व्याख्या चार वेदों के रूप में की। बताया जाता है कि विश्वामित्र कठोर तप करके गायत्री मंत्र को सभी के लिए लेकर आए थे, इससे पहले यह सिर्फ देवताओं के लिए था।

क्या है गायत्री मंत्र के 24 अक्षरों की 24 शक्तियां

ऊं भूर्भुवः स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्। 

गायत्री मंत्र (फोटो.सोशल मीडिया)

1 – तत्

देवता- गणेश, सफलता शक्ति

2 – स

देवता- नरसिंह, पराक्रम शक्ति

3 – वि

देवता- विष्णु, पालन शक्ति

4 – तु

देवता- शिव, कल्याण शक्ति

5 – व

देवता- कृष्ण, योग शक्ति

6 – रे

देवता- राधा, प्रेम शक्ति

7 – णि

देवता- लक्ष्मी, धन शक्ति

8 – यं

देवता- अग्नि, तेज शक्ति

9 – भ

देवता- इन्द्र, रक्षा शक्ति

10 – र्गो

देवता- सरस्वती, बुद्धि शक्ति

11 – दे

देवता- दुर्गा, दमन शक्ति

12 – व

देवता- हनुमान, निष्ठा शक्ति

13 – स्य

देवता- पृथ्वी, धारण शक्ति

14 – धी

देवता- सूर्य, प्राण शक्ति

15 – म

देवता- राम, मर्यादा शक्ति

16 – हि

देवता- सीता, तप शक्ति

17 – धि

देवता- चंद्र, शांति शक्ति

18 – यो

देवता- यम, काल शक्ति

19 – यो

देवता- ब्रह्मा, उत्पादक शक्ति

20 – न

देवता- वरुण, रस शक्ति

21 – प्र

देवता- नारायण, आदर्श शक्ति

22 – चो

देवता- हयग्रीव, साहस शक्ति

23 – द

देवता- हंस, विवेक शक्ति

24 – यात्

देवता- तुलसी, सेवा शक्ति

गायत्री मंत्र (फोटो .सोशल मीडिया)

गायत्री जयंती पर भद्रा कब से कब तक है?

गायत्री जयंती के दिन भद्रा सुबह में 07:08 से शुरु होकर रात में 08:09 बजे तक रहेगा। इस भद्रा का वास पाताल लोक में होगा। बता दें कि भद्रा में पूजा, मंत्र जाप आदि वर्जित नहीं है।

गायत्री जयंती का महत्व

गायत्री जयंती के दिन गायत्री माता की पूजा करने और गायत्री मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति मिलती है, मन एकाग्र होता है, आत्मिक चेतना का विकास और आध्यात्मिक उन्नति होती है। बुद्धि और ज्ञान में बढ़ोत्तरी होती है। गायत्री मां की कृपा से पाप और नकारात्मकता का नाश होता है। स्मरण श​क्ति बढ़ती है।

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