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कब है फरवरी की पहली एकादशी? जानिए सही तिथि, मुहूर्त और व्रत नियम

Vijaya Ekadashi 2026: फरवरी 2026 में एकादशी व्रत 12 या 13 फरवरी को है, इसे लेकर लोगों में भ्रम है। यहां जानें विजया एकादशी की सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पारण समय और पूजा विधि की पूरी जानकारी।

सीमा कुमारी

Ekadashi Kab Hai 2026: धार्मिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टि से एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है। यह शुभ एवं पावन तिथि हर महीने दो बार—कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में आती है। इस बार फरवरी महीने की एकादशी 13 फरवरी 2026 को रखी जाएगी, जिसे विजया एकादशी के नाम से जाना जाता है।

फाल्गुन मास की विजया एकादशी इस बार शुक्रवार के दिन पड़ रही है, जो इसे और भी शुभ बना रही है। धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि, इस दिन सच्चे मन से व्रत और पूजा करने से जीवन की समस्त बाधाएं दूर होती हैं और पापों का नाश होता है। इसलिए भक्त पूरे विधि-विधान से भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। चलिए आपको बताते हैं फरवरी में विजया एकादशी कब पड़ रही है?

विजया एकादशी 2026: डेट और शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर विजया एकादशी व्रत किया जाता है। इस खास अवसर पर जगत के पालनहार भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा कर व्रत कथा का पाठ करते हैं। इससे साधक को व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

डेट और शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार विजया एकादशी व्रत 13 फरवरी को किया जाएगा और व्रत का पारण करने का समय 14 फरवरी को सुबह 07 बजे से 09 बजकर 14 मिनट तक है।

फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत- 12 फरवरी को दोपहर 12 बजकर 22 मिनट पर

फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का समापन- 13 फरवरी को दोपहर 02 बजकर 25 मिनट पर

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:18 से 06:10 बजे तक अमृत काल: सुबह 09:08 से 10:54 बजे तक अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:13 से 12:58 बजे तक विजय मुहूर्त: दोपहर 02:27 से 03:11 बजे तक

व्रत पारण का सही समय

विजया एकादशी का पारण 14 फरवरी 2026 को किया जाएगा। पारण का समय सुबह 07:00 बजे से 09:14 बजे तक रहेगा। हरि वासर की समाप्ति उसी दिन सुबह 08:20 बजे होगी।

पारण हमेशा हरि वासर के बाद ही करना शुभ माना जाता है। विजया एकादशी के दिन सात्विक आहार लें। भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें. क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूरी रखें। यह दिन संयम और श्रद्धा के साथ बिताना ही व्रत का सार माना गया है।

विजया एकादशी का आध्यात्मिक महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को विधिपूर्वक करने से कामों में आ रही बाधा दूर होती है। साथ ही जीवन की चुनौतियां दूर होती हैं। शत्रुओं पर विजय मिलती है। भगवान विष्णु साधक की पूजा से प्रसन्न होकर मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

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