वरुथिनी एकादशी पर करें इन चीजों का दान (सौ.सोशल मीडिया)  
धर्म

वरुथिनी एकादशी के दिन इन वस्तुओं के दान से मिलेगी श्रीलक्ष्मीनारायण की विशेष कृपा, जीवन में आएगी खुशहाली

वरुथिनी एकादशी के दिन कुछ विशेष चीजों का दान करने से व्यक्ति को भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है और उसके जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। ऐसे में आइए जानते हैं वरुथिनी एकादशी पर किन चीजों का दान करना शुभ होता है

सीमा कुमारी

Varuthini Ekadashi 2025: 24 अप्रैल, गुरुवार को बैशाख महीने की एकादशी मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में बैशाख वरुथिनी एकादशी का बहुत महत्व है। यह शुभ एवं पावन तिथि जगत के संचालन कर्ता भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा के लिए समर्पित है।

ज्योतिष धर्मगुरु के अनुसार, वरुथिनी एकादशी के दिन पूजा और व्रत रखने से व्यक्ति के हर कष्ट दूर हो जाते हैं और उसे शुभ फल की प्राप्ति होती है। वरुथिनी एकादशी के दिन कुछ विशेष चीजों का दान करने से व्यक्ति को भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है और उसके जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। ऐसे में आइए जानते हैं वरुथिनी एकादशी पर किन चीजों का दान करना शुभ होता है।

वरुथिनी एकादशी पर करें इन चीजों का दान

गरीबों को फल दान

- बैशाख वरूथिनी एकादशी के दिन विष्णु जी की विधि-विधान से पूजा करने के बाद गरीबों को फल दान करने चाहिए इस दिन फल दान करने से पितृ द्वीप और शनिदोष से मुक्ति मिलती है।

धन का दान

- वरुथिनी एकादशी पर धन दान करना बेहद शुभ होता है। ऐसा माना जाता है कि इस पूजा के बाद अपनी क्षमता के अनुसार धन दान करने से धन लाभ होता है और आय के नए स्रोत खुलते हैं. इस दिन सबसे पहले मंदिर में भगवान को धन दान या अर्पित करना चाहिए।

गेंदे के फूल का दान

- अगर आप भगवान विष्णु को वरुथिनी एकादशी के दिन पीले गेंदे के फूल दान करते हैं तो आपको धन लाभ होगा। लेकिन ध्यान रहे कि फूल दान करने का मतलब है मंदिर में भगवान की सेवा के लिए फूल देना। कहा जाता है कि बचपन में प्रेम संबंध ऐसे ही होते हैं।

अनाज का दान

धार्मिक मान्यता के अनुसार, वरूथिनी एकादशी पर अनाज का दान करने से व्यक्ति को नौकरी की प्राप्ति होती है। इस दिन पहली पूजा में भगवान विष्णु के चरणों में पीले फूल दान करें।

जानिए वरुथिनी एकादशी का धार्मिक महत्व

वरुथिनी एकादशी का व्रत करने से मनुष्य को सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को कन्यादान के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है। यह व्रत दुख और दरिद्रता को दूर करने वाला माना गया है और इसके प्रभाव से व्यक्ति को मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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