Shradh Ke Baad Kya Na Kare: पितरों की आत्मा की शांति और उनके आशीर्वाद पाने के लिए हर साल मनाया जाने वाला पितृ पक्ष इस बार 26 सितंबर, शनिवार से शुरू हो रही है आगामी 10 अक्टूबर को तक चलेगा। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि, पितृपक्ष के इन 16 दिनों परिवार के लोग अपनी परंपरा के अनुसार श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन और दान आदि करते हैं।
गरुड़ पुराण में श्राद्ध का अर्थ ही श्रद्धा से किया गया कर्म माना गया है। श्राद्ध का फल तभी प्राप्त होता है जब पूरी नियम पालन किए गए हों, इसमें दिखावे की जगह नहीं है। ऐसे में तर्पण या श्राद्ध पूरा करने के बाद घर लौटकर क्या काम नहीं करना चाहिए। यहां जानिए।
गरुड़ पुराण में श्राद्ध का मतलब श्रद्धा से किया गया कर्म माना गया है। बताया जाता है कि,श्राद्ध कर्म पूरा करके घर लौटने के बाद किसी से लड़ाई -झगड़ा, वाद विवाद, गाली गलौज नहीं करना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि इससे पितर नाराज होते हैं और श्राद्ध स्वीकार नहीं करते हैं। इसलिए ऐसी गलती भूलकर भी नही करना चाहिए।
पितृ कर्म करने के बाद तन और मन दोनों की पवित्रता बनाए रखें। शास्त्रों में ये भी बताया गया है कि, केवल खान-पान से नहीं, बल्कि उस दिन की मानसिक और शारीरिक शुद्धता भी जरुरी मानी गई है। ऐसे में इस दौरान लहसुन प्याज से बना भोजन न खाएं। भोग विलास का त्याग करें। सात्विक व्यवहार अपनाए।
कई परिवारों में श्राद्ध के दिन बाल कटवाने, शेविंग करने या नाखून काटने से परहेज किया जाता है। मान्यता है कि पितृ पक्ष का समय सादगी, संयम और श्रद्धा का होता है, इसलिए इस दौरान श्रृंगार से जुड़े कामों को टालना उचित माना जाता है।
गरुड़ पुराण में श्राद्ध के बाद ब्राह्मण को दान और दक्षिणा देने की बात कही गयी हैं। दान और दक्षिणा में आप चावल, गेहूं, दाल, आटा वस्त्र: धोती, अंगवस्त्र या अन्य नए वस्त्र दक्षिणा आदि दे सकते हैं।