Bhaumvati Amavasya 2026 Date And Muhurat: भौमवती अमावस्या हिंदू धर्म में सबसे महत्वपूर्ण अमावस्या में से एक मानी जाती है। जब अमावस्या की तिथि मंगलवार के दिन पड़ती है, तब उसे भौमवती अमावस्या कहा जाता है। मंगलवार भगवान हनुमान और मंगल ग्रह यानी भौम को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दुर्लभ संयोग पूजा-पाठ, दान-पुण्य और पितरों के लिए किए जाने वाले कर्मों का फल कई गुना बढ़ाकर देता है।
इस दिन कई भक्त व्रत रखते हैं, पितृ तर्पण करते हैं और साथ ही भगवान हनुमान, भगवान विष्णु और पीपल के वृक्ष की पूजा करते हैं। इस दिन दान-पुण्य करने से सुख-समृद्धि, बाधाओं से मुक्ति और मंगल दोष का निवारण होता है।
भौम अमावस्या की पूजा कर्ज से मुक्ति, पारिवारिक समस्याओं के समाधान, स्वास्थ्य लाभ और आर्थिक कठिनाइयों से राहत की प्रार्थना के लिए भी शुभ माना जाता है।
हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ अमावस्या तिथि की शुरुआत 13 जुलाई 2026 (सोमवार) को शाम 6:49 बजे होगी और इसका समापन 14 जुलाई 2026 (मंगलवार) को दोपहर 3:12 बजे होगा।
चूंकि 14 जुलाई, मंगलवार को सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए इसी दिन भौमवती अमावस्या का व्रत और पूजन किया जाएगा।
'भौमवती' शब्द भौम यानी मंगल ग्रह से बना है। जब अमावस्या मंगलवार के दिन आती है, तो इसे अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य, भगवान की आराधना और पितरों का स्मरण करने से विशेष आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है।
यह दिन भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त करने, मंगल दोष, केतु दोष तथा जीवन की विभिन्न बाधाओं को दूर करने के लिए भी विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इस दिन भगवान हनुमान की पूजा करने से साहस, आत्मबल और सफलता की प्राप्ति होती है।
कई लोग भौमवती अमावस्या के दिन पितृ तर्पण करते हैं। इस दिन श्रद्धालु जल में काले तिल को मिलाकर जल से अपने पूर्वजों का तर्पण करते हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं।
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धापूर्वक पितृ तर्पण करने से पितृ दोष कम होता है तथा परिवार में सुख, समृद्धि और उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सूर्योदय से पहले स्नान करें। यदि किसी पवित्र नदी में स्नान संभव न हो, तो स्नान के पानी में कुछ बूंदें गंगाजल मिलाकर श्रद्धापूर्वक स्नान करें।
काले तिल मिले जल से अपने पितरों का तर्पण करें और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें।
भगवान हनुमान को सिंदूर, चमेली का तेल, फूल और लड्डू अर्पित करें। हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इससे मंगल और केतु दोष के प्रभाव कम हो सकते हैं।
पीपल के पेड़ के नीचे मिट्टी का दीपक जलाकर भगवान विष्णु की पूजा करें। ऐसी मान्यता है कि इससे आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं और जीवन में समृद्धि आती है।
जिन लोगों पर कर्ज का बोझ है या आर्थिक परेशानियां हैं, वे ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं। इससे भगवान मंगल की कृपा प्राप्त होती है।
इस दिन काले तिल, गुड़, गेहूं, मसूर की दाल, वस्त्र और भोजन का दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।
गाय को गुड़ और चना खिलाएं तथा पक्षियों और अन्य पशुओं के लिए भोजन की व्यवस्था करें। धार्मिक मान्यता है कि इससे पुण्य की प्राप्ति होती है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, भौमवती अमावस्या उन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती है, जो मंगल दोष, केतु दोष, कर्ज या जीवन में लगातार आ रही बाधाओं से परेशान हैं। सनातन धर्म में इस दिन भगवान हनुमान की आराधना, मंत्र जाप और दान-पुण्य करने से ग्रहों के प्रभाव सकारात्मक पड़ते हैं तथा जीवन में स्थिरता, साहस और सफलता प्राप्त होती है।