Bhadali Navami Muhurat: भडल्या नवमी हर साल आषाढ़ माह की नवमी तिथि को मनाया जाता है। भडली नवमी आश्रम शुक्ल पक्ष, भटली नवमी, कंदर्प नवमी, जैसे नामों से भी जाना जाता है। यह पर्व भगवान विष्णु से जुड़ा हुआ है। इस दिन से जगत के पालनहार अगले 4 माह के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस दौरान किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं।
बता दें कि अक्षय तृतीया की तरह भडल्या नवमी भी स्वयं सिद्ध मुहूर्त है। इस बार यह बुधवार को पड़ रहा है। इस तिथि पर आप कोई भी मांगलिक कार्य कर सकते हैं, जैसे गृह प्रवेश, मुंडन संस्कार, व्यापार, वाहन, भूमि, भवन आदि खरीदने के लिए भी यह दिन शुभ है।
भड़ली नवमी 22 जुलाई 2026 को सुबह 5 बजकर 16 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 23 जुलाई 2026 को सुबह 7 बजकर 6 मिनट पर समाप्त होगी।
चातुर्मास के शुरु होने से पहले किसी भी प्रकार के शुभ कार्य के लिए भड़ली नवमी का दिन शुभ माना जाता है। धर्म ग्रन्थों के अनुसार जिन लोगों के विवाह के लिए कोई शुभ मुहूर्त नहीं निकलता है, उनका विवाह भड़ली नवमी के दिन किया सकता है।
भड़ली नवमी के व्रत उपवास करने से भक्तों पर देवी पार्वती की कृपा होती है। उनकी आराधना से धन-धान्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। भगवान विष्णु के भक्त इस दिन अपने आराध्य के निमित्त पूजन, हवन तथा व्रत आदि करते हैं।
भड़ली नवमी के बाद 25 जुलाई 2026 से चातुर्मास आरंभ हो जाएगा और प्रभु श्री हरि विष्णु 4 महीनों के लिए क्षीर सागर के भीतर योग निद्रा में चले जाएंगे। माना जाता है कि इन 4 महीनों में जगत का संचालन महादेव करते हैं। इस बीच सभी प्रकार के मांगलिक कार्य बंद हो जाते हैं।