Dwadashi Dates In August : हिन्दू पंचांग में द्वादशी तिथि की एक अत्यन्त शुभ एवं पवित्र तिथि मानी जाती है। यह हर महीने शुक्ल और कृष्ण पक्ष की बारहवीं तिथि को आती है और यह शुभ तिथि भगवान विष्णु एवं मां लक्ष्मी की पूजा करने के लिए समर्पित है। एक वर्ष में कुल 24 द्वादशी तिथि होती है जिसे अलग –अलग कई नामों से जाना जाता हैं जैसे – पद्मा द्वादशी, गोविंद द्वादशी, वैष्णव द्वादशी, जयंत द्वादशी आदि।
धर्म शास्त्रों के अनुसार, द्वादशी तिथि को व्रत, पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत उपयुक्त माना गया है। इस तिथि का विशेष महत्व एकादशी व्रत के पारण से भी जुड़ा है। द्वादशी तिथि पर व्रत का पारण करना धार्मिक दृष्टि से अनिवार्य और लाभकारी होता है।
पंचांग के अनुसार, अगस्त महीने में श्रावण मास कृष्णपक्ष की द्वादशी तिथि 10 अगस्त 2026 दिन सोमवार को थी जबकि शुक्लपक्ष की द्वादशी तिथि 24 अगस्त 2026 दिन सोमवार के दिन पड़ रही है।
10 अगस्त 2026 सोमवार कृष्णपक्ष की द्वादशी तिथि 9 अगस्त को 11:05 प्रातः से 10 अगस्त को 08:01 प्रातः तक।
24 अगस्त 2026 सोमवार शुक्लपक्ष की द्वादशी तिथि 24 अगस्त को 04:19 प्रातः से 25 अगस्त को 06:21 प्रातः तक।
द्वादशी के दिन प्रातः जल्दी उठकर गंगा जल से स्नान करें या तीर्थ जल का प्रयोग करें।
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा के सामने दीपक, धूप और नैवेद्य चढ़ाकर पूजा करें।
एकादशी व्रत का पारण इस दिन उचित समय पर करें। पारण करते समय सात्विक भोजन करें।
इस दिन गरीबों, ब्राह्मणों, और जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र, और धन का दान करें।
पद्मा द्वादशी: यह तिथि भगवान विष्णु की पूजा के लिए महत्वपूर्ण है।
गोविंद द्वादशी: इसे भगवान कृष्ण और गोवर्धन पूजा से जोड़ा जाता है।
वैष्णव द्वादशी: वैष्णव संप्रदाय के भक्तों के लिए यह विशेष तिथि है।
जयंत द्वादशी: इस दिन धार्मिक कृत्य करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, द्वादशी तिथि भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति का दिन है। यह तिथि साधकों के लिए मोक्ष प्राप्ति और जीवन के कष्टों से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है। इस दिन व्रत, दान, और धार्मिक अनुष्ठान करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और वह पुण्य का भागी बनता है।