(सौजन्य सोशल मीडिया) 
धर्म

पितृ दोष शांति के लिये विशेष है अमावस्या का दिन, निवारण के लिये करें ये उपाय

हरियाली अमावस्या आज 4 अगस्त को मनाई जा रही है। सावन माह की अमावस्या का दिन पितृ दोष की शांति के लिये भी विशेष माना गया है। इस दिन कुछ उपाय कर आप पितृ दोषों से मुक्ति पा सकते हैं।

रीना पंवार

नवभारत डेस्क-  श्रावन माह की अमावस्या को हरियाली अमावस्या भी कहा जाता है। इस बार हरियाली अमावस्या आज 4 अगस्त को मनाई जा रही है। इस बार श्रावण अमावस्या के दिन सिद्धि योग और पुष्य नक्षत्र जैसे शुभ योगों का निर्माण भी हो रहा है। अतः इन शुभ योग में की गई पूजा-उपासना-जप- अनुष्ठान- दान-पुण्य का कई गुना शुभ फल जातक को प्राप्त होता है। सावन माह की अमावस्या का दिन पितृ दोष की शांति के लिये भी विशेष माना गया है।

इस दिन कुछ उपाय कर आप पितृ दोषों से मुक्ति पा सकते हैं। अमावस्या के दिन स्नान का भी खास महत्व है, इसलिए अगर आप किसी पवित्र नदी में स्नान नहीं कर पाएं है, तो घर पर नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर लें। स्नान करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए और एक जल के लोटे में थोड़े से काले तिल मिलाकर पितरों के लिए तर्पण करें और भगवान से अपने पितरों की मुक्ति की प्रार्थना करें।

पितरों के निमित्त जरूर करें दान

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार हरियाली अमावस्या के दिन भगवान शिव की पूजा उपासना जरूर करें। इस दौरान उनका जलाभिषेक करें, इस दिन आप रुद्राभिषेक का अनुष्ठान भी कर सकते हैं। सावन की अमावस्या के दिन भगवान शिव का गंगा जल से जलाभिषेक करें और बेलपत्र- फल- फूल- नैवेद्य-अक्षत- चंदन इत्यादि चढ़ाएं। इस दिन भगवान शिव की शुद्ध देसी घी का दीपक व कपूर से आरती उतारे, ऐसा करने से भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है। घर में समृद्धि, सुख- शांति व आरोग्य की प्राप्ति होती है। हरियाली अमावस्या के दिन आप अपने पितरों के निमित्त किसी शुद्ध सात्विक ब्राह्मण को दान दक्षिणा दें और घर में बनने वाले भोजन का पहला भाग गाय को खिलाएं।

पितृ दोष की शांति के लिए विशेष दिन

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, अमावस्या का दिन पितृ दोष की शांति के लिये विशेष दिन माना गया है। अतः यदि आपकी जन्म कुंडली में पितृ दोष है, तो आप इस दिन पितृ दोष निवारण के कुछ उपाय कर सकते हैं। पितृ दोष से मुक्ति के लिए सावन अमावस्या के दिन पिंडदान, दान-पुण्य और तर्पण करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। यदि आप पिंडदान या तर्पण नहीं कर सकते हैं, तो पितृ सूक्त पाठ, पितृ कवच पाठ, पितृ गायत्री पाठ और गीता पाठ करें और अमावस्या की पहली रात अर्थात चौदस की रात को कुछ देर बैठकर जागरण करें व गीता के पाठ करें व मंत्रों का जाप करें।

पीपल व तुलसी के पेड़ को छूना वर्जित

हरियाली अमावस्या के दिन कोई भी एक पेड़ जरूर लगाएं। इस दिन बरगद, नीम, बेलपत्र, आंवला, शमी, अशोक आदि वृक्ष लगाए जा सकते हैं। रविवार के दिन तुलसी व पीपल का पेड़ नहीं लगाएं, क्योंकि रविवार के दिन पीपल व तुलसी के पेड़ को छूना शास्त्रों में वर्जित बताया गया है।

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