Akshaya Tritiya Gold Buying Muhurat: हर साल अक्षय तृतीया का पावन पर्व धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। धर्म शास्त्रों में अक्षय तृतीया को शुभ तिथि बताया गया है। इस दिन अबूझ मुहूर्त होता है यानि किसी भी शुभ काम को करने के लिए इस दिन मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती।
ज्योतिषयों के अनुसार, इस वर्ष अक्षय तृतीया पर रवि योग, त्रिपुष्कर योग, सौभाग्य योग और आयुष्मान योग जैसे शुभ संयोग बन रहे हैं। इसके साथ ही शुक्र ग्रह अपनी स्वराशि में गोचर कर मालव्य महापुरुष राजयोग का निर्माण कर रहे हैं। साथ ही गजकेसरी राजयोग का भी संयोग बन रहा है। जिसके कारण इस पर्व का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व और अधिक बढ़ गया है।
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का आरंभ 19 अप्रैल को सुबह 10:48 बजे होगा। यह तिथि 20 अप्रैल को सुबह 7:27 बजे समाप्त होगी। ऐसे दुर्लभ योगों में किए गए शुभ कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार] अक्षय तृतीया पर किया गया दान-पुण्य, जप-तप और पूजा का फल अक्षय होता है। यानी उसका कभी क्षय नहीं होता। इसी कारण इसे अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है।
मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। इसे सतयुग और त्रेतायुग के आरंभ से भी जोड़ा जाता है। महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण का पांडवों को दिया गया अक्षय पात्र भी इस दिन की महिमा से जुड़ा माना जाता है।
चौकी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। सबसे पहले कलश स्थापना कर भगवान का आह्वान करें। गंगाजल से स्नान कराएं या जल का छिड़काव करें। फिर चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप और दीप अर्पित करें। भगवान को पीले वस्त्र, फल, मिठाई, विशेष रूप से खीर या सत्तू का भोग लगाएं। मंत्र का जप करें और माता लक्ष्मी की आरती उतारें।
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19 अप्रैल-शुभ मुहूर्त- सुबह 10:49 से 20 अप्रैल को सुबह 05:51 बजे तक 20 अप्रैल- अमृत मुहूर्त- दोपहर 02:26 से 03:52 बजे तक 20 अप्रैल-विजय मुहूर्त- दोपहर 02:30 से 03:22 बजे तक