Premanand Ji Maharaj (Source. Pinterest) 
धर्म

ये 8 संकेत बताते हैं कि आपके दिल में सच्चा प्रेम जाग चुका है, जानिए प्रेमानंद जी महाराज का गूढ़ रहस्य

Signs of Love: भागदौड़ भरी ज़िंदगी में हर इंसान प्रेम की तलाश में है, लेकिन बहुत कम लोग यह समझ पाते हैं कि सच्चा प्रेम क्या होता है। श्री प्रेमानंद जी महाराज इस बारें में क्या बताते है जानें।

सिमरन सिंह

Premanand Ji Maharaj Discourses: आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में हर इंसान प्रेम की तलाश में है, लेकिन बहुत कम लोग यह समझ पाते हैं कि सच्चा प्रेम क्या होता है। श्री प्रेमानंद जी महाराज बताते हैं कि जब मनुष्य संसारिक पहचान से ऊपर उठकर ईश्वर से जुड़ता है, तभी उसके जीवन में भगवत प्रेम का उदय होता है। यही प्रेम इंसान को उसका असली स्वरूप दिखाता है।

हम सब एक ही सत्य के अंश हैं

प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि हम सभी उसी परम सत्य के अंश हैं। यह शरीर पंचतत्वों से बना है, जो नश्वर है। समाज ने व्यवस्था के लिए जाति, वर्ग और कर्म के आधार पर पहचान बनाई है, लेकिन इनका उद्देश्य केवल ईश्वर तक पहुंचने में सहायता करना है, न कि किसी को छोटा या बड़ा बनाना। सच्चा धर्म वही है, जो हमें ईश्वर प्रेम की ओर ले जाए।

भगवान को चाहिए सिर्फ अपनापन

ईश्वर आपकी जाति, धन या पद नहीं देखते, वे केवल आपका अपनापन देखते हैं। गिरिराज में श्रीनाथ जी और एक बालक की कथा का उल्लेख करते हुए महाराज बताते हैं कि जब किसी भक्त ने सवाल किया कि प्रभु एक साधारण बालक से क्यों खेलते हैं, तो उत्तर मिला, "वह मुझसे बहुत प्यार करता है, और मैं उनसे प्यार करता हूँ जो मुझसे प्यार करते हैं।" यही सच्चे प्रेम की पहचान है।

देह नहीं, आत्मा है सच्चाई

यह शरीर एक दिन मिट्टी में मिल जाएगा, लेकिन आत्मा सदा शुद्ध और अमर है। धन, रूप और जाति जैसी पहचानें केवल उपाधियां हैं, जो कई बार भक्ति के मार्ग में बाधा बन जाती हैं। जिनके पास संसारिक घमंड नहीं होता, उन पर अक्सर ईश्वर की कृपा अधिक होती है।

सच्चे साधक की पहचान

महाराज स्पष्ट कहते हैं कि सच्चा ईश्वर प्रेमी कभी संसारिक चीज़ों का भिखारी नहीं होता। जो संत का वेश धारण कर धन या यश की चाह रखे, वह केवल नाटक है। सच्चा भक्त न दाम चाहता है और न काम, क्योंकि उसे अपना कुंजबिहारी मिल चुका होता है।

गुरु के नियम क्यों ज़रूरी हैं

गुरु द्वारा दिए गए नियमों का पालन न करने पर साधक तीन बाधाओं में फंस जाता है नींद, भटकते विचार और वासनाएं। जब जिह्वा पर नियंत्रण आ जाता है, तो बाकी इंद्रियां स्वतः वश में आ जाती हैं।

प्रेम के 8 दिव्य लक्षण

जब हृदय ईश्वर प्रेम में पिघलता है, तो आठ स्वाभाविक भाव प्रकट होते हैं, स्तंभ, स्वेद, रोमांच, स्वरभंग, कंप, विवर्णता, अश्रु और प्रलय। ये किसी रोग के लक्षण नहीं, बल्कि दैवी आनंद की अभिव्यक्ति हैं।

सबसे आसान मार्ग "राधा राधा"

महाराज कहते हैं कि जीवन को व्यर्थ न जाने दें। अगर शास्त्र समझना कठिन लगे, तो बस 'राधा राधा' का आश्रय लें। जैसा आप सोचते हैं, वैसे ही बन जाते हैं। यही नाम सबसे बड़ा धन है और यही आपको परम प्रेम तक पहुंचाता है।

Vande Mataram Controversy: साध्वी प्राची का कांग्रेस पर हमला, बोली- गांधी परिवार के डीएनए में जिन्ना का DNA

आज की ताजा खबर 16 अगस्त LIVE: वाराणसी एयरपोर्ट पर चली गोलियां; बंगाल में आशीष बनर्जी ने की आत्महत्या

ISI कनेक्शन और बड़ी साजिश! सुखबीर बादल पर हमलों को लेकर भड़कीं हरसिमरत, गृहमंत्री से की NIA जांच की मांग

Vande Mataram Controversy: सोनिया गांधी के बचाव में कांग्रेस-TMC-DMK, CPI-M ने पूछा- पार्टी का रुख क्या है?

लगातार किया गया बदनाम...पूर्व मंत्री आशीष बनर्जी की मौत पर छलका ममता बनर्जी का दर्द, कहा- झूठे आरोप लगाए गए