Premanand Ji Maharaj Discourses: आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में हर इंसान प्रेम की तलाश में है, लेकिन बहुत कम लोग यह समझ पाते हैं कि सच्चा प्रेम क्या होता है। श्री प्रेमानंद जी महाराज बताते हैं कि जब मनुष्य संसारिक पहचान से ऊपर उठकर ईश्वर से जुड़ता है, तभी उसके जीवन में भगवत प्रेम का उदय होता है। यही प्रेम इंसान को उसका असली स्वरूप दिखाता है।
प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि हम सभी उसी परम सत्य के अंश हैं। यह शरीर पंचतत्वों से बना है, जो नश्वर है। समाज ने व्यवस्था के लिए जाति, वर्ग और कर्म के आधार पर पहचान बनाई है, लेकिन इनका उद्देश्य केवल ईश्वर तक पहुंचने में सहायता करना है, न कि किसी को छोटा या बड़ा बनाना। सच्चा धर्म वही है, जो हमें ईश्वर प्रेम की ओर ले जाए।
ईश्वर आपकी जाति, धन या पद नहीं देखते, वे केवल आपका अपनापन देखते हैं। गिरिराज में श्रीनाथ जी और एक बालक की कथा का उल्लेख करते हुए महाराज बताते हैं कि जब किसी भक्त ने सवाल किया कि प्रभु एक साधारण बालक से क्यों खेलते हैं, तो उत्तर मिला, "वह मुझसे बहुत प्यार करता है, और मैं उनसे प्यार करता हूँ जो मुझसे प्यार करते हैं।" यही सच्चे प्रेम की पहचान है।
यह शरीर एक दिन मिट्टी में मिल जाएगा, लेकिन आत्मा सदा शुद्ध और अमर है। धन, रूप और जाति जैसी पहचानें केवल उपाधियां हैं, जो कई बार भक्ति के मार्ग में बाधा बन जाती हैं। जिनके पास संसारिक घमंड नहीं होता, उन पर अक्सर ईश्वर की कृपा अधिक होती है।
महाराज स्पष्ट कहते हैं कि सच्चा ईश्वर प्रेमी कभी संसारिक चीज़ों का भिखारी नहीं होता। जो संत का वेश धारण कर धन या यश की चाह रखे, वह केवल नाटक है। सच्चा भक्त न दाम चाहता है और न काम, क्योंकि उसे अपना कुंजबिहारी मिल चुका होता है।
गुरु द्वारा दिए गए नियमों का पालन न करने पर साधक तीन बाधाओं में फंस जाता है नींद, भटकते विचार और वासनाएं। जब जिह्वा पर नियंत्रण आ जाता है, तो बाकी इंद्रियां स्वतः वश में आ जाती हैं।
जब हृदय ईश्वर प्रेम में पिघलता है, तो आठ स्वाभाविक भाव प्रकट होते हैं, स्तंभ, स्वेद, रोमांच, स्वरभंग, कंप, विवर्णता, अश्रु और प्रलय। ये किसी रोग के लक्षण नहीं, बल्कि दैवी आनंद की अभिव्यक्ति हैं।
महाराज कहते हैं कि जीवन को व्यर्थ न जाने दें। अगर शास्त्र समझना कठिन लगे, तो बस 'राधा राधा' का आश्रय लें। जैसा आप सोचते हैं, वैसे ही बन जाते हैं। यही नाम सबसे बड़ा धन है और यही आपको परम प्रेम तक पहुंचाता है।