सांकेतिक तस्वीर  Source- Social Media
राजस्थान

राजस्थान निकाय चुनाव में BJP की भारी फजीहत! प्रत्याशी को मिला महज 1 वोट, कांग्रेस के आगे सारी रणनीति फेल

Rajasthan Nikay Chunav Result: राजस्थान के परबतसर नगर पालिका चुनाव में BJP प्रत्याशी कैलाश चंद्र को सिर्फ 1 वोट मिला। खास बात यह कि जिस वार्ड से लड़े, वहां उनका नाम वोटर लिस्ट में नहीं था।

अर्पित शुक्ला

BJP Candidate Gets 1 Vote in Rajasthan Nikay Chunav: राजनीति की बिसात पर हार-जीत के किस्से तो आपने कई सुने होंगे। लेकिन राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले से निकली यह चुनावी दास्तान दिलचस्प है। साथ ही हैरान करने वाली भी है। परबतसर नगर पालिका चुनाव के नतीजे जब जब सामने आए, तब BJP उम्मीदवार के नाम के आगे लिखा केवल '1 वोट', जो पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है।

वार्ड नंबर वार्ड नंबर 13 में भारतीय जनता पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी कैलाश चंद्र को महज एक वोट मिले। कुल 573 वोट पड़े, मगर ईवीएम खुली तो कैलाश चंद्र के हिस्से में सिर्फ एक अकेला वोट दर्ज हुआ।

खुद का भी वोट नहीं ले पाए BJP प्रत्याशी

अचरज की बात यह रही कि कैलाश चंद्र जिस वार्ड से चुनावी दंगल में उतरे थे, वहां की वोटर लिस्ट में उनका अपना नाम था ही नहीं। उनके अपने परिजन और सगे-संबंधी तो दूसरे वार्ड में मतदाता थे, ऐसे में जिस वार्ड में प्रचार का पसीना बहाया, वहां अपनों का एक भी वोट नहीं मिल सका।

नतीजा यह हुआ कि पूरे वार्ड से सिर्फ एक अनजान वोटर ने उन पर भरोसा जताया, और इस एक वोट के दिलचस्प आंकड़े ने पूरे राजस्थान निकाय चुनाव का सबसे अनोखा किस्सा गढ़ दिया।

रणनीतिक खानापूर्ति के लिए उतारा था प्रत्याशी?

परबतसर नगर पालिका के चुनावी गलियारों में अब सबसे बड़ा सवाल यही तैर रहा है कि क्या बीजेपी ने यह सीट सिर्फ औपचारिकता पूरी करने के लिए गंवाई? स्थानीय जानकारी के अनुसार, वार्ड नंबर 13 में पार्टी के पास कोई प्रत्याशी नहीं था।

कांग्रेस प्रत्याशी को बिना लड़े निर्विरोध जीत हासिल करने से रोकने के लिए ऐन मौके पर कैलाश चंद्र को उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतार दिया गया। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम और प्रत्याशी चयन के सियासी गणित को लेकर बीजेपी संगठन का आधिकारिक बयान नहीं आया है।

RLP का भी वही हाल

इस तरह की फजीहत का ये सिलसिला सिर्फ बीजेपी तक सीमित नहीं रहा। वार्ड नंबर 20 से राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के प्रत्याशी भंवरलाल का हाल भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। अमूमन नागौर और आसपास के इलाकों में RLP का अच्छा-खासा प्रभाव माना जाता है और पार्टी ने निकाय चुनावों में कई सीटों पर जीत दर्ज भी की है। ऐसे में RLP जैसे क्षेत्रीय प्रभाव वाले दल के प्रत्याशी का केवल 1 वोट पर सिमट जाना स्थानीय राजनीति के जानकारों को हैरान कर रहा है।

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