Speaker Om Birla Tea Party: संसद का मानसून सत्र इस बार हंगामे की भेंट चढ़ गया। गुरुवार को लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई। गुरुवार को सुबह 11 बजे राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के साथ लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई। इस दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सदन में मौजूद रहे।
राष्ट्रगीत के बाद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। सत्र की समाप्ति के बाद पीएम मोदी और अमित शाह के साथ स्पीकर की चाय पार्टी में विपक्ष की तरफ से केवल डीएमके की सांसद एम के कनिमोझी पहुंचीं।
हमेशा की तरह इस बार भी संसद सत्र के बाद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने इस बार भी अपने चैंबर में फ्लोर लीडर्स के साथ चाय पार्टी रखी। पार्टी में सत्तापक्ष से प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और राजनाथ सिंह पहुंचे।
विपक्ष ने एक बार फिर से ओम बिरला की चाय पार्टी का बहिष्कार किया। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव समेत विपक्षी दलों की तरफ से कोई भी नेता इसमें नहीं पहुंचा। ऐसे में सिर्फ डीएमके की ओर से कनिमोझी के चाय पार्टी में शामिल होने पर चर्चा शुरू हो गई है।
बता दें, संसद सत्र की समाप्ति के बाद हर बार लोकसभा स्पीकर ओम बिरला अपने चैंबर में पारंपरिक चाय पार्टी रखते हैं। इसमें सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्ष के फ्लोर लीडर्स शामिल होते हैं। मौजूदा सत्र में छात्र आंदोलन पर पुलिस की कार्रवाई, राम मंदिर में चढ़ावा चोरी जैसे मुद्दों पर चर्चा को लेकर खूब हंगामा हुआ। इससे सदन की कार्यवाही बाधित रही। गुरुवार को राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के साथ अनिश्चितकाल के लिए सदन की कार्यवाह स्थगित कर दी गई। इसके साथ ही विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला की चाय पार्टी का भी बहिष्कार कर दिया।
पिछले साल मॉनसून सत्र के बाद भी विपक्ष ने स्पीकर की पारंपरिक चाय पार्टी का बहिष्कार किया था। उस समय डीएमके भी विपक्ष के साथ थी। डीएमके का कोई नेता पार्टी में शामिल नहीं हुआ था, लेकिन इस बार कनिमोझी के चाय पार्टी में शामिल होना डीएमके की विपक्ष से दूरी और सत्ता पक्ष के करीब साफ दिख रही है।
मई में तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही डीएमके और कांग्रेस के रिश्ते खराब चल रहें हैं। इसकी शुरुआत मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के साथ कांग्रेस के हाथ मिलाने के बाद से हुई। इसके बाद डीएमके ने संसद में कांग्रेस से अलग बैठने की भी अपील की थी।