योगा हमारी प्राचीन सभ्यताओं में से एक है। जल योगा भी योग का ही एक प्रकार है। इसमें शरीर जल में रहकर योगा अभ्यास करता है। विदेशों में इस तरह का योगा काफी प्रचलन में है। इसको अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ले जाया चुका है।पानी में योग करने से कई तरह की बीमारियां दूर हो जाती हैं। योगासन में सबसे पहले सांसों को नियंत्रित करना सिखाया जाता है। मुंह में ऑक्सीजन भरकर उसे नियंत्रित कर छोड़ते हुए यह आसन किए जाते हैं। इससे श्वसन प्रक्रिया बेहतर होती है और फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है। पानी में शवासन करने से पानी की तरंगे दिमाग में शांति एवं शीतलता का अनुभव करवाती हैं। इससे एकाग्रता बढ़ती है। वृद्धजनों के लिए यह सर्वश्रेष्ठ है। यह स्ट्रैस लेवल और वजन कम कर स्टेमिना बढ़ाता है।वॉटर योगा में सारे आसन पानी के भीतर किए जाते हैं। जल हमारे शरीर के टॉक्सिंस को बाहर निकालने में मदद करता है। इसके अलावा इस योगा को करने से हमारे चेहरे की चमक बढ़ती है।वॉटर योगा में व्यक्ति जल में खड़े होकर कुछ आसन करता है। जल में रहकर कुछ स्पेशल आसन ही किए जा सकते हैं। जैसे कि ताड़ासन, तिर्यक ताड़ासन, कोणासन, गरुड़ासन. इन आसनों को बड़ी आसानी से जल के अंदर किया जा सकता है।जल शांति का प्रतीक होता है, इसलिए इसका अभ्यास करने से आपका स्ट्रेस, एंग्जायटी, हार्ट प्रॉब्लम, लिवर, किडनी और कैंसर जैसे कई रोगों का रिस्क कम होने लगता है। पानी में बैठकर भी प्राणायाम कर सकते हैं। हालांकि यह बहुत अधिक प्रैक्टिस के बाद ही संभव है। इससे आपको काफी ज्यादा लाभ मिलेगा।