विनोद खन्ना (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
साल 1968 में रिलीज हुई फिल्म 'मन का मीत' से विनोद खन्ना ने अपने फिल्मी सफर की शुरुआत एक विलेन के तौर पर की थी। इसके बाद उन्होंने 'मेरे अपने' और 'मेरा गांव मेरा देश' में डाकू का रोल निभाकर इंडस्ट्री में तहलका मचा दिया।
70 और 80 के दशक में आई फिल्में 'परवरिश', 'अमर अकबर एंथनी', 'मुकद्दर का सिकंदर' और 'हेरा फेरी' जैसी क्लासिक फिल्मों में उनकी मौजूदगी ने हर सीन को यादगार बना दिया।
इसके अलावा फिरोज खान के साथ आई फिल्म 'कुर्बानी' और सस्पेंस से भरपूर 'द बर्निंग ट्रेन' ने बॉक्स ऑफिस पर कई रिकॉर्ड तोड़ दिए।अपने करियर की सबसे शानदार ऊंचाइयों पर रहते हुए विनोद खन्ना अध्यात्म की तलाश में ओशो के शिष्य बन गए और कुछ सालों के लिए फिल्मों से दूरी बना ली।जब विनोद खन्ना ने फिल्म 'सत्यमेव जयते' से बड़े पर्दे पर दोबारा कदम रखा, तो दर्शकों ने उनका शानदार स्वागत किया और यह फिल्म बड़ी हिट साबित हुई।