टॉम ऑल्टर का जन्म उत्तराखंड के मसूरी में हुआ था। उनके दादा-दादी अमेरिका से भारत आए थे और यहीं बस गए थे। टॉम की शुरुआती पढ़ाई-लिखाई भी मसूरी के वुडस्टॉक स्कूल में हुई। भारत की मिट्टी में पले-बढ़े होने के कारण उनकी हिंदी और उर्दू भाषा पर असाधारण पकड़ थी। टॉम ऑल्टर ने अपनी शुरुआती जिंदगी में स्पोर्टस में भी गहरी दिलचस्पी दिखाई थी। एक्टिंग की दुनिया में कदम रखने से पहले उन्होंने हरियाणा के एक स्कूल में बतौर टीचर भी काम किया था। हालांकि सिनेमा के प्रति उनके जुनून ने आखिरकार उन्हें सही दिशा दिखा ही दी।टॉम ऑल्टर ने एक बार सुपरस्टार राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर की फेमस फिल्म आराधना देखी थी। इस फिल्म ने उनके मन पर ऐसा असर डाला कि उन्होंने एक्टर बनने का फैसला कर लिया। अपने इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में दाखिला लिया।एक्टिंग के अलावा टॉम ऑल्टर ने पत्रकारिता के क्षेत्र में भी अपनी एक अलग छाप छोड़ी। खेलकूद, विशेष रूप से क्रिकेट में उनकी बेहद रुचि थी। उन्होंने कई सालों तक खेल पत्रकार के रूप में विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के लिए लिखा। क्रिकेट हिस्ट्री में उनका नाम एक और खास वजह से दर्ज है। क्रिकेट के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का पहला टीवी इंटरव्यू टॉम ऑल्टर ने ही लिया था। उस समय सचिन सिर्फ 15 साल के थे। टॉम का यह इंटरव्यू आज भी भारतीय खेल पत्रकारिता के यादगार लम्हों में गिना जाता है।टॉम ऑल्टर ने सिर्फ फिल्मों और टीवी सीरियल तक खुद को सीमित नहीं रखा। वह थिएटर और रंगमंच की दुनिया से भी गहराई से जुड़े रहे। उन्होंने फेमस नाटककार नसीरुद्दीन शाह के साथ मिलकर मोटली थिएटर ग्रुप की स्थापना की थी।टॉम ऑल्टर ने मिर्जा गालिब और बहादुर शाह जफर जैसे ऐतिहासिक पात्रों को स्टेज पर इतनी जीवंतता से निभाया कि दर्शक दंग रह गए। वह अक्सर कहा करते थे कि उनका रूप-रंग भले ही विदेशी दिखता हो, लेकिन सोच और अहसास से वह पूरी तरह भारतीय हैं।