गैंडे के रोचक तथ्य सोर्स- सोशल मीडिया
गैंडा दुनिया के बड़े स्थलीय स्तनधारियों में शामिल है। भारी शरीर और मजबूत सींग के बावजूद यह मांसाहारी नहीं, बल्कि पूरी तरह शाकाहारी जीव है। अलग-अलग प्रजातियां घास, पत्तियां, झाड़ियां और दूसरे पौधे खाती हैं।आज दुनिया में गैंडे की पांच जीवित प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें दो अफ्रीकी और तीन एशियाई प्रजातियां हैं। एशिया में एक सींग वाला गैंडा, जावन गैंडा और सुमात्राई गैंडा पाए जाते हैं।गैंडे का सींग हड्डी से नहीं बना होता। इसमें मुख्य रूप से केराटिन नाम का प्रोटीन होता है, यही प्रोटीन इंसानों के बाल और नाखूनों में भी पाया जाता है। इसलिए गैंडे के सींग को लेकर कई प्रचलित धारणाएं वैज्ञानिक रूप से सही नहीं हैं।गैंडे की प्रजाति के अनुसार सींगों की संख्या अलग होती है। जावन और एक सींग वाले गैंडे में एक सींग होता है, जबकि काले, सफेद और सुमात्राई गैंडे में दो सींग होते हैं। यही खासियत उन्हें पहचानने में मदद करती है।भारत में पाया जाने वाला एक सींग वाला गैंडा अपनी मोटी त्वचा और शरीर पर बनी तहों के कारण दूर से ही अलग दिखाई देता है। यह मुख्य रूप से घासभूमि और आर्द्र क्षेत्रों में रहता है। भारत और नेपाल में इसके संरक्षण से इसकी संख्या में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।गैंडे की दृष्टि अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाती है। इसके मुकाबले सूंघने और सुनने की क्षमता अधिक महत्वपूर्ण होती है। आसपास किसी हलचल का पता लगाने के लिए गैंडा अपनी दूसरी इंद्रियों पर काफी निर्भर रहता है।गैंडे को कीचड़ में लोटते देखना आम बात है। कीचड़ शरीर को ठंडा रखने, कीड़ों से बचाने और त्वचा पर मौजूद परजीवियों से राहत पाने में मदद कर सकता है। इसलिए उसका कीचड़ में जाना उसके शरीर की प्राकृतिक देखभाल का हिस्सा है।गैंडे केवल आवाजों से ही संकेत नहीं देते। वे सूंघने योग्य संकेतों के जरिए भी दूसरे गैंडों की मौजूदगी और क्षेत्र की जानकारी हासिल कर सकते हैं। आवाजों में फुंफकार, गुर्राहट और अलग-अलग तरह की पुकार शामिल हो सकती हैं।अवैध शिकार और प्राकृतिक आवास का खत्म होना गैंडों के लिए बड़ी चुनौतियां हैं। सींग के अवैध व्यापार के कारण लंबे समय तक इनका शिकार किया गया। आज भी संरक्षण, सुरक्षित आवास और अवैध शिकार रोकना इनके भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।एक सींग वाले गैंडे की संख्या में संरक्षण प्रयासों से बड़ा सुधार हुआ है, लेकिन सभी गैंडे सुरक्षित नहीं हैं। जावन, सुमात्राई और काले गैंडे गंभीर संकट की श्रेणी में हैं। इनके प्राकृतिक आवास और सुरक्षित क्षेत्रों की रक्षा करना बेहद जरूरी है।