नारियल पानी source: Pinterest
असली नारियल पानी सीधे हरे नारियल से निकाला जाता है और पूरी तरह प्राकृतिक होता है। पैकेट या बोतल में मिलने वाला नारियल पानी भी इसी से बनता है, लेकिन इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए अतिरिक्त प्रोसेसिंग से गुजारा जाता है।सबसे पहले नारियल से पानी निकालकर उसे छाना जाता है, ताकि गूदे के कण अलग हो सकें। इसके बाद इसे हाई-टेम्परेचर पर यूएचटी (अल्ट्रा हाई टेम्परेचर) प्रोसेस से गुजारा जाता है, जिससे इसमें मौजूद बैक्टीरिया और एंजाइम खत्म हो जाते हैं और शेल्फ लाइफ बढ़ जाती है।हाई-हीट प्रोसेसिंग के दौरान नारियल पानी में मौजूद कुछ प्राकृतिक एंजाइम और विटामिन्स की मात्रा घट सकती है। हालांकि इससे पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स पर ज्यादा असर नहीं पड़ता।कई रिसर्च में सामने आया है कि कुछ प्रोसेस्ड नारियल पानी में शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए सोडियम मेटाबाइसल्फाइट या पोटैशियम सॉर्बेट जैसे प्रिजर्वेटिव्स की थोड़ी मात्रा मिलाई जाती है, जबकि प्योर यूएचटी वाले प्रोडक्ट्स में अक्सर इनकी जरूरत नहीं पड़ती।कुछ बाजारू ब्रांड्स स्वाद बढ़ाने के लिए नारियल पानी में अतिरिक्त चीनी मिलाते हैं, जो कुछ मामलों में कुल वजन का 5 से 7 प्रतिशत तक हो सकती है। यह व्रत के दौरान हल्का और लो-कैलोरी विकल्प चाहने वालों के लिए ध्यान देने वाली बात है।खरीदते वक्त पैकेट पर "100% प्योर कोकोनट वाटर" और इनग्रेडिएंट्स लिस्ट जरूर पढ़ें। अगर उसमें "एडेड शुगर" या किसी प्रिजर्वेटिव का नाम लिखा हो, तो वह प्योर नारियल पानी नहीं माना जा सकता।ज्यादातर प्योर और बिना चीनी वाला पैक्ड नारियल पानी सामान्य लोगों के लिए सुरक्षित माना जाता है, लेकिन अगर आप डायबिटीज या किडनी से जुड़ी किसी समस्या से जूझ रहे हैं, तो व्रत में इसे शामिल करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर रहेगा।ताजे नारियल पानी में मौजूद प्राकृतिक एंजाइम, हल्की मिठास और कुछ सूक्ष्म पोषक तत्व पैकेजिंग प्रोसेस के दौरान थोड़े कम हो सकते हैं, भले ही बाकी पोषण काफी हद तक बरकरार रहता है।टेट्रा पैक या सीलबंद बोतल में आने वाला नारियल पानी खुली जगह बिकने वाले कटे हुए नारियल के मुकाबले संक्रमण और मिलावट के खतरे से ज्यादा सुरक्षित माना जाता है, बशर्ते पैकेजिंग डैमेज न हो और एक्सपायरी डेट के भीतर इस्तेमाल किया जाए।व्रत के दौरान हमेशा कम से कम प्रोसेसिंग और बिना एडेड शुगर वाला नारियल पानी चुनें। अगर संभव हो तो ताजे नारियल से निकाला गया पानी सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है, और पैक्ड वर्जन को सिर्फ सुविधा के तौर पर इस्तेमाल करें, न कि नियमित आदत के तौर पर।